बेदखली नहीं, पहले पुनर्वास! सिलीगुड़ी में रेलवे भूमि के निवासियों ने उठाई जोरदार मांग
अजित प्रसाद/ सिलीगुड़ी। रेलवे की जमीन पर वर्षों से रह रहे लोगों को बेदखली की कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। इसी आशंका के बीच सिलीगुड़ी में रेलवे भूमि पर रहने वाले लोगों के अधिकार और पुनर्वास की मांग को लेकर आवाज तेज होने लगी है। इसी मुद्दे को लेकर ‘सिलीगुड़ी रेलवे भूमि निवासी पुनर्वास अधिकार मंच’ ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि रेलवे की जमीन को विकास कार्यों के लिए खाली कराना आवश्यक है, तो प्रभावित परिवारों को बेघर करने से पहले उनके लिए उचित और सम्मानजनक पुनर्वास की व्यवस्था की जानी चाहिए।
मंच के प्रतिनिधियों का कहना है कि वे रेलवे की जमीन पर किसी तरह के मालिकाना हक का दावा नहीं कर रहे हैं। उनका मुख्य मुद्दा वर्षों से यहां रह रहे गरीब परिवारों का भविष्य और उनका सुरक्षित आशियाना है। मंच का कहना है कि विकास कार्यों का विरोध नहीं किया जा रहा है, लेकिन विकास के नाम पर ऐसे परिवारों को अचानक हटाना उचित नहीं होगा, जिनके पास रहने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है।
मंच के अनुसार, रेलवे की जमीन पर लंबे समय से रह रहे अनेक परिवारों की आर्थिक स्थिति कमजोर है। कई परिवारों की रोजी-रोटी भी आसपास के क्षेत्र से जुड़ी हुई है। यदि उन्हें बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के अचानक हटा दिया जाता है, तो उनके सामने आवास के साथ-साथ रोजगार और बच्चों की पढ़ाई जैसी कई गंभीर समस्याएं खड़ी हो सकती हैं। ऐसे में बेदखली की किसी भी कार्रवाई से पहले प्रत्येक प्रभावित परिवार का सर्वे कराकर उनकी वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाना चाहिए।
मंच ने मांग की है कि प्रभावित परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) समेत अन्य सरकारी आवास योजनाओं के माध्यम से स्थायी आवास उपलब्ध कराया जाए। उनका कहना है कि जिन लोगों के पास अपनी जमीन या घर नहीं है, उनके लिए पुनर्वास केवल अस्थायी व्यवस्था तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक तरीके से बसाने की ठोस योजना तैयार की जानी चाहिए।
प्रतिनिधियों ने कहा कि सिलीगुड़ी में रेलवे लाइन, सड़क, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे से जुड़े विकास कार्य जरूरी हैं। शहर के विकास के लिए यदि रेलवे की जमीन खाली कराने की जरूरत पड़ती है, तो प्रभावित लोगों के हितों को भी विकास की प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। मंच का मानना है कि विकास का अर्थ केवल आधारभूत ढांचे का निर्माण नहीं, बल्कि इससे प्रभावित लोगों के जीवन को सुरक्षित रखना भी है।
मंच ने प्रशासन और रेलवे प्राधिकरण से अपील की है कि किसी भी प्रकार की बेदखली की कार्रवाई से पहले प्रभावित परिवारों के साथ संवाद किया जाए। पुनर्वास की स्पष्ट नीति, वैकल्पिक आवास और आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित करने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाए।
अब इस मांग को लेकर जिला प्रशासन और रेलवे प्राधिकरण का क्या रुख रहता है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं। आने वाले दिनों में पुनर्वास को लेकर प्रशासन और रेलवे की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, यह सिलीगुड़ी के रेलवे भूमि निवासियों के लिए महत्वपूर्ण होगा।




