*हरेला पर्व- जी रया, जागि रया, यो दिन बार, भेटने रया, नरेन्द्र सिंह लडवाल*

 

*राजू बोहरा / विशेष संवाददाता*

भारत एक विविधताओं का देश है। भारत देश में एक नीले आसमान के नीचे कई समृद्ध संस्कृति फल फूल रही हैं। भारत की अनेकताओं में कुछ त्यौहार ऐसे हैं ,जो सारे देश को एक साथ जोड़ते हैं। सावन माह में देवभूमि उत्तराखंड में एक प्रकृति को समर्पित त्यौहार हरेला मनाया जाता हैं। इसी त्योहार के निमित्त भारत की राजधानी नई दिल्ली में नई सोच नई पहल संस्था के बैनर के तले अलौकिक हरेला महोत्सव का आयोजन किया गया इस विशेष मौके पर महिलाओं द्वारा झोड़े ,बच्चों द्वारा उत्तराखंडी लोकगीत एवं पौधारोपण किया गया जहां आज हमारी संस्कृति विलुप्त हो रही है वहीं आज इस संस्था द्वारा अपनी बोली भाषा से उत्तराखंडी बच्चों को उत्तराखंडी संस्कृति से रूबरू करा रही है जो काबिले तारीफ है प्राकृतिक सौंदर्य हरियाली के प्रतीक हरेला त्यौहार खासकर कुमाऊं में हरेला के त्यौहार की तैयारियां विशेष रूप से की जाती है पहाड़ की इस पारंपरिक लोक संस्कृति के त्यौहार को लेकर लोगों में बड़ा ही हर्षोल्लास देखा जाता है क्योंकि हरेला का मतलब है हरियाली, हरेला त्योहार मनाए जाने के बाद से पूरे क्षेत्र में हर जगह हरियाली छाती है बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण होता है यह भी मान्यता है यह हरेले के दिन लगाया गया पेड़ कभी सूखता नहीं है या मरता नहीं है।

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