आकाश पर भारतीय वायु सेना का होगा राज
-राफेल ताकत के बदल देंगे सारे समीकरण
हरप्रीत भट्टी
नई दिल्ली। भारत ने एक बार फिर चीन और पाकिस्तान को साफ चेतावनी दे दी है कि अब नया भारत सिर्फ जवाब नहीं देताए बल्कि दुश्मन की रणनीति को जड़ से तोड़ने की ताकत रखता है। हम आपको बता दें कि भारतीय वायुसेना के लिए 114 राफेल युद्धक विमानों की खरीद का फैसला दक्षिण एशिया में ताकत का पूरा समीकरण बदलने वाली चाल है। करीब तीन लाख पच्चीस हजार करोड़ रुपये के इस महा समझौते ने बीजिंग और इस्लामाबाद दोनों की नींद उड़ा दी है। खास बात यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फ्रांस यात्रा से ठीक पहले उठाया गया यह कदम दुनिया को साफ संदेश देता है कि भारत अपनी सैन्य ताकत को किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं पड़ने देगा।
भारतीय वायुसेना ने पिछले वर्षों में जिस अदम्य साहस और पराक्रम का प्रदर्शन किया हैए उसने दुनिया को भारत की नई सैन्य सोच का परिचय दिया है। बालाकोट से लेकर वास्तविक नियंत्रण रेखा तक भारतीय वायुसेना ने यह साबित किया कि वह दुश्मन के घर में घुसकर जवाब देने की क्षमता रखती है। अब वही वायुसेना राफेल जैसे घातक और आधुनिक युद्धक विमानों से और अधिक प्रचंड होने जा रही है। देखा जाये तो राफेल केवल विमान नहींए बल्कि हवा में भारत की दहाड़ है। इसकी मारक क्षमताए इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालीए लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की ताकत और दुश्मन की वायु रक्षा को ध्वस्त करने की क्षमता इसे बेहद घातक बनाती है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस समझौते के तहत अठारह विमान सीधे फ्रांस से आएंगेए जबकि 96 विमानों का निर्माण भारत में होगा। यह पहली बार होगा जब राफेल का निर्माण फ्रांस के बाहर किया जाएगा। लगभग पचास प्रतिशत स्वदेशीकरण के साथ यह कार्यक्रम भारत को केवल खरीदार नहींए बल्कि रक्षा निर्माण शक्ति बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। इससे भारत की रक्षा औद्योगिक क्षमता बढ़ेगीए हजारों रोजगार पैदा होंगे और भविष्य में स्वदेशी युद्धक विमान कार्यक्रमों को भी नई गति मिलेगी।
हालांकि यह भी सच है कि केवल राफेल से पूरी समस्या का समाधान नहीं होगा। मिग.29ए मिराज.2000 और जगुआर जैसे पुराने विमान अगले दशक में सेवा से बाहर होने लगेंगे। दूसरी ओर तेजस मार्क.1 ए और तेजस मार्क.2 जैसी स्वदेशी परियोजनाएं देरी से जूझ रही हैं। ऐसे में भारतीय वायुसेना को संख्या और तकनीक दोनों स्तरों पर दबाव का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन इस संकट के बीच भी भारत ने बहुस्तरीय रणनीति अपनाई है। एक ओर राफेलए दूसरी ओर उन्नत मध्यम युद्धक विमान कार्यक्रम और साथ ही मानव रहित युद्धक प्रणालियों पर निवेशए यह दिखाता है कि नई दिल्ली आने वाले बीस वर्षों की हवाई शक्ति संरचना तैयार कर रही है।
इसके अलावाए रूस का सुखोई.57 भी चर्चा में है। रूस भारत को तकनीक हस्तांतरणए स्रोत कोड और भारत में निर्माण जैसे आकर्षक प्रस्ताव दे रहा है। कई पूर्व वायुसेना अधिकारियों का मानना है कि सीमित संख्या में सुखोई.57 विमानों की खरीद भारत के लिए अंतरिम समाधान हो सकती है। लेकिन भारत फिलहाल किसी एक देश पर पूरी तरह निर्भर होने की बजाय बहुध्रुवीय रक्षा रणनीति अपना रहा है। यही भारत की सबसे बड़ी ताकत है।
दक्षिण एशिया में इसका सबसे गहरा असर पाकिस्तान पर पड़ेगा। पाकिस्तान पहले ही आर्थिक संकट और सैन्य निर्भरता से जूझ रहा है। ऐसे समय में भारत का 200 से अधिक राफेल विमानों की दिशा में बढ़ना पाकिस्तान की वायु शक्ति को पूरी तरह असंतुलित कर देगा। चीन भले ही पाकिस्तान को आधुनिक हथियार देए लेकिन भारतीय वायुसेना का युद्ध अनुभवए प्रशिक्षण स्तर और तकनीकी समन्वय पाकिस्तान के लिए भय का कारण बना रहेगा। राफेल की मौजूदगी से भारत को दो मोर्चों पर युद्ध की स्थिति में भी निर्णायक बढ़त मिलने की संभावना मजबूत होगी।

