आंखों की रोशनी के लिए कॉर्निया ट्रांसप्लांट का विकल्प पीपीपी :डॉ.अग्रवाल

उषा पाठक
वरिष्ठ पत्रकार

चेन्नई,27 जुलाई 2025 (एजेंसी) सुप्रसिद्ध नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ.अमर अग्रवाल ने कहा है,कि आंखों की रोशनी खो चुके लाखों रोगियों के लिए कॉर्निया ट्रांसप्लांट एक विकल्प है,लेकिन यह सर्जरी जोखिम भरा होता है।अब इसके बदले पिनहोल प्यूपिलोप्लास्टी (पीपीपी) सर्जरी अपनायी जा सकती है।

डॉ.अग्रवाल ने यह बात एक इंटरव्यू के दौरान कही। उन्होंने कहा कि पिनहोल प्यूपिलोप्लास्टी (पीपीपी)एक सर्जिकल तकनीक है, जिसमें टांकों की मदद से पुतली को छोटे केंद्रीकृत आकार में ढाला जाता है,जिससे अनियमित कॉर्निया वाले मरीजों की दृष्टि बेहतर होती है।

डॉ.अग्रवाल्स आई हॉस्पिटल ग्रुप के चेयरमैन डॉ.अग्रवाल ने कहा कि कॉर्नियल ट्रांसप्लांट में सर्जरी से जुड़े जोखिम होते हैं।लंबे समय तक इम्यून सप्रेशन की ज़रूरत पड़ती है और यह डोनर कॉर्निया की उपलब्धता पर निर्भर करता है,जो लगातार कम होती जा रही है।

जाने माने नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अग्रवाल ने हाल ही में पिनहोल प्यूपिलोप्लास्टी नामक एक क्रांतिकारी तकनीक देश में पेश की है,जो कॉर्नियल ट्रांसप्लांट का एक सरल और अत्यंत प्रभावी विकल्प होने का दावा किया गया है।यह तकनीक रूस, वियतनाम और मिस्र सहित कई देशों में पहले ही व्यापक रूप से अपनाई जा चुकी है।

उन्होंने कहा कि यह तकनीक कॉर्निया की वैश्विक कमी का एक समाधान है, जिसके कारण लाखों लोग दृष्टिहीनता का सामना कर रहे हैं। जिन मामलों में कॉर्नियल ट्रांसप्लांट जोखिम भरा या व्यावहारिक नहीं होता, वहां यह तकनीक एक सुरक्षित और प्रभावी विकल्प के रूप में कार्य करती है।

डॉ.अग्रवाल ने दावा किया कि यह प्रक्रिया केराटोकोनस, कस्कारिंग या हाईअर-ऑर्डर एबरेशन जैसी स्थितियों के कारण उत्पन्न कॉर्नियल असमानताओं वाले मरीजों की दृष्टि में उल्लेखनीय सुधार ला सकती है, जिससे कई बार चश्मे या कॉन्टैक्ट लेंस की ज़रूरत नहीं होती है।

डॉ.अग्रवाल ने कहा कि यह एक न्यूनतम इनवेसिव सर्जिकल प्रक्रिया है, जिसमें आइरिस में एक छोटी, कस्टम साइज़ की केंद्रीकृत ओपनिंग (पिनहोल) बनाई जाती है,ताकि आने वाली रोशनी को फिल्टर किया जा सके। यह पिनहोल परिधीय विकृत किरणों को रोकता है और केवल केंद्रित किरणों को रेटिना तक पहुंचाता है, जिससे अनियमित कॉर्निया वाले मरीजों की दृष्टि स्पष्ट रूप से बेहतर हो जाती है।

उन्होंने कहा कि कॉर्नियल ट्रांसप्लांट की तुलना में इसमें जटिल सर्जरी, लंबा उपचारक समय और रिजेक्शन का खतरा होता है, पीपीपी एक सरल, तेजी से ठीक होने वाली, कम जोखिम वाली और प्रभावी तकनीक है।

डॉ.अग्रवाल ने दावा किया कि पिनहोल प्यूपिलोप्लास्टी की सबसे बड़ी ताकत इसकी सरलता में है। इस प्रक्रिया के लिए न तो महंगे उपकरणों की ज़रूरत होती है और न ही डोनर टिशू पर निर्भरता रहती है। इसे सामान्य नेत्र शल्य चिकित्सा उपकरणों की मदद से किया जा सकता है,जिससे यह तकनीक कम संसाधन वाले क्षेत्रों में भी आसानी से अपनाई जा सकती है।

उन्होंने कहा कि यही कारण है, कि विश्वभर में विभिन्न स्तर के नेत्र चिकित्सा केंद्र इस तकनीक को तेजी से अपना रहे हैं,ताकि स्थानीय स्तर पर कॉर्नियल अंधत्व और दृष्टि विकृति के मामलों का समाधान किया जा सके।

डॉ. अग्रवाल् ने कहा कि दुनियाभर में 2 करोड़ से ज़्यादा लोग दृष्टि बाधित या नेत्रहीन हैं, और इनमें से अधिकांश को कभी कॉर्निया डोनर नहीं मिल पाएगा। कॉर्नियल अंधत्व के मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है, ऐसे में पिनहोल प्यूपिलोप्लास्टी एक विकल्प है।

उल्लेखनीय है,कि इस ग्रुप की देश एवं विदेशों में मौजूद 250 से अधिक अस्पतालों में यह प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है और इसका लाभ लोंगो को मिल रहा है। राजधानी दिल्ली में इस ग्रुप का पहला अस्पताल इसी वर्ष शुरू हुआ है,जिसके प्रमुख एम्स के नेत्र विभाग के अध्यक्ष रहे जे.एस. टिटियाल को बनाया गया है। एल.एस.

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