सुप्रीम कोर्ट की कथित घटना पर राहुल गांधी से माफी की मांग, दस्तक ने लिखा खुला पत्र

नई दिल्ली, 14 अक्टूबर। डॉ. आंबेडकर सोसाइटी फॉर थॉट्स, एक्शंस एंड कॉन्शसनेस (दस्तक) ने 12 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट परिसर में हुई कथित घटना को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से सार्वजनिक रूप से बिना शर्त माफी मांगने की मांग की है। संगठन के अध्यक्ष डॉ. एन.के. संत ने राहुल गांधी को लिखे खुले पत्र में आरोप लगाया कि विपक्षी नेताओं के साथ बड़ी भीड़ लेकर बिना अनुमति सर्वोच्च न्यायालय परिसर में प्रवेश करना न्यायपालिका की गरिमा और संवैधानिक मर्यादाओं के विपरीत है।
पत्र में दस्तक ने इस घटना को भारतीय लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय बताते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय देश की एक महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था है, जिसकी स्वतंत्रता और गरिमा बनाए रखना प्रत्येक नागरिक और जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है। संगठन के अनुसार, इस तरह की गतिविधियां न्यायपालिका पर दबाव बनाने की आशंका पैदा करती हैं और संविधान की मूल भावना को प्रभावित कर सकती हैं।
डॉ. संत ने कहा कि बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने देश को एक मजबूत और स्वतंत्र न्यायपालिका की व्यवस्था दी थी। ऐसे में संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करना उनके आदर्शों के प्रति सच्ची प्रतिबद्धता का परिचायक है। दस्तक ने कहा कि कथित घटना से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्गों सहित संविधान में आस्था रखने वाले लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं।
ईवीएम और निर्वाचन आयोग पर उठाए सवाल
खुले पत्र में दस्तक ने ईवीएम और निर्वाचन आयोग पर लगाए जाने वाले आरोपों, मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध तथा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से विपक्षी प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात को लेकर भी सवाल उठाए। संगठन ने इन मामलों में लगाए गए आरोपों के आधार और उपलब्ध साक्ष्यों पर स्पष्टीकरण मांगा। पत्र में विदेशों में भारतीय लोकतांत्रिक संस्थाओं की कथित आलोचना, प्रदर्शनों और न्यायपालिका पर दबाव बनाने की आशंका का भी उल्लेख किया गया है।
दस्तक ने राहुल गांधी से इन मुद्दों पर स्पष्टीकरण देने के साथ-साथ 12 अक्टूबर की कथित घटना के लिए देश की जनता, न्यायपालिका और बाबासाहेब के आदर्शों में विश्वास रखने वाले नागरिकों से सार्वजनिक रूप से बिना शर्त माफी मांगने की अपील की।
वर्ष 2000 में स्थापित दस्तक एक पंजीकृत सामाजिक संगठन है, जो शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक समृद्धि और वंचित समुदायों के कल्याण के लिए कार्य करता है। संगठन ने संवैधानिक मूल्यों और लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा की रक्षा को आवश्यक बताया है।

