चिंतन:हमारे देश ने कभी किसी को पराया नहीं समझा!

देश :शासन सत्ता और समाज

 

राजीव कुमार झा

हमारे लोकतंत्र की संसदीय शासन व्यवस्था की जिन विसंगतियों से देश की राजनीति त्रस्त दिखाई देती है,
बिहार विधानसभा के आगामी चुनावों में उनसे तमाम राजनीतिक दल किस तरह किनारा करके राजनीति और टिकट बंटवारे में भाई भतीजावाद पारिवारिक स्वार्थ अपराध और भ्रष्टाचार के दलदल से देश को मुक्त कराने की मुहिम में शामिल होंगे ! यह बिहार विधानसभा चुनाव से पहले अब सबसे अहम मुद्दा प्रतीत हो रहा है। इसमें आपकी चिंतन आधारित राजनीति की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। इस देश ने कभी किसी को पराया नहीं समझा और आजादी के बाद देश में धर्म निरपेक्ष शासन व्यवस्था को अपनाया जाना सबसे बड़ा प्रमाण है। इसके बावजूद आज भारत अमरीका और पश्चिम यूरोप के देशों की वैश्विक धौंस और दबदबे का सामना करता हुआ अपनी एकता और अखंडता की सबसे बड़ी लड़ाई में शामिल है। हम आशा करते हैं कि भारत की जनता अपनी अन्य समस्याओं को सुलझाने की दिशा में भी एकजुट होकर आगे बढ़ेगी और यह तभी होगा जब राजनीति में अमीरों
ताकतवरों की जो जमात शिरकत करती देश को बर्बाद करने पर अमादा है, सचमुच देश की जनता ऐसी ताकतों से किनारा करके ही जयप्रकाश नारायण के सपनों को साकार कर सकती है। हमें स्वीकार करना होगा कि जेपी आंदोलन के लोग भी आज देश की राजनीति में दिग्भ्रमित हो चुके हैं और कांग्रेस के साथ जनता पार्टी की विरासत से जुड़ा राजनीतिक चिंतन और उसमें शामिल नेतागण देश की राजनीति में सबसे बड़ा अवसरवादी गुट बनकर उभरा है और यह जमात अब पूरी तरह से अपनी विश्वसनीयता को भी देश की जनता के बीच अपनी विश्वसनीयता को खो चुका है। यूपी में समाजवादी पार्टी की राजनीति और उसके पतन के तमाम प्रसंगों से आप वाकिफ हैं। बिल्कुल ऐसा ही बिहार में राजद के साथ घटित हुआ है। शायद इन्हीं परिस्थितियों में नीतीश कुमार ने देश की राजनीति में भाजपा से हाथ मिलाकर भारत की राजनीति को एक नयी दिशा देने की जिम्मेदारी स्वीकार की थी। हमारे भावी भारत की राजनीति में अपनी भूमिका को लेकर फिर बेहद सचेत होना होगा। बिहार की लूट खसोट में शामिल लोग फिर नये सिरे से सक्रिय हो रहे हैं और अब सबको यह ख्याल रखना होगा कि बिहार विधानसभा चुनावों के बाद फिर कहीं यह देश नशेड़ियों गंजेरियों और बदमाशों की सामाजिक – राजनीतिक कूटनीति का शिकार न हो जाए। आइए हम अपनी सोच में नयी परिस्थितियों को लेकर चिंतन करते हुए आगे बढ़ें और बिहार की राजनीति यहां के शासन और समाज में अपनी कारगर भूमिका को नये सिरे से तय करें।

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