14,140 फीट पर गूंजा भाई-बहन के रिश्ते का संदेश, जवानों की कलाई पर सजी राखी

* नाथूला सीमा पर 26 युवतियों ने सेना और आईटीबीपी जवानों को बांधा रक्षासूत्र, राष्ट्रीय एकता का दिया संदेश

 

अजित प्रसाद
नाथूला (सिक्किम)। भारत-चीन सीमा से सटे नाथूला दर्रे पर रक्षाबंधन का पर्व इस बार देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता के रंग में नजर आया। समुद्र तल से करीब 14,140 फीट की ऊंचाई पर 26 युवतियों ने भारतीय सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवानों को राखी बांधकर उनके प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त की।

छह राज्यों की बेटियां, सीमा पर जवान बने भाई

हेमंत यादव फाउंडेशन की ओर से आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में देश के छह राज्यों से आई युवतियों ने हिस्सा लिया। इनमें कई छात्राएं वर्तमान में सिक्किम में अध्ययनरत हैं, जबकि कुछ सिक्किम विश्वविद्यालय से जुड़ी हुई हैं। युवतियों ने सीमा पर तैनात जवानों को अपना भाई और देश का रक्षक बताते हुए उनकी कलाई पर राखी बांधी।

राखी के धागे में बंधा देश की एकता का संकल्प

कार्यक्रम में युवतियों ने कहा कि देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले जवान पूरे देश के लिए परिवार के सदस्य की तरह हैं। कठिन मौसम और दुर्गम परिस्थितियों के बावजूद सैनिक जिस समर्पण के साथ राष्ट्र की सुरक्षा में जुटे रहते हैं, वह सभी के लिए प्रेरणादायक है।

जाति-धर्म से ऊपर है रक्षाबंधन की भावना : डॉ. यादव

हेमंत यादव फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. हेमंत कुमार यादव ने कहा कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के रिश्ते का पर्व नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास, जिम्मेदारी, सुरक्षा और राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करने का अवसर भी है। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन की भावना जाति, धर्म, भाषा और क्षेत्र की सीमाओं से परे है।

नाथूला-चोला की कहानी, जवानों की जुबानी

कार्यक्रम के दौरान सेना के अधिकारियों ने युवतियों को नाथूला, चोला और जेलेपला दर्रों के इतिहास और सामरिक महत्व की जानकारी दी। हिमालयी सीमा की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और देश की सुरक्षा में इन दर्रों की भूमिका के बारे में भी बताया गया।

जवानों ने जताया आभार, छात्राओं को दिया आशीर्वाद

सीमा पर पहुंचकर जवानों के साथ रक्षाबंधन मनाने के लिए सेना और आईटीबीपी के जवानों ने युवतियों और फाउंडेशन का आभार व्यक्त किया। जवानों ने छात्राओं को आशीर्वाद और शुभकामनाएं दीं।

नाथूला में आयोजित यह अनोखा रक्षाबंधन समारोह सीमा पर तैनात जवानों और देश के नागरिकों के बीच भावनात्मक जुड़ाव, सम्मान और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बन गया।

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