प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी को लेकर गुरुवार को पश्चिम बंगाल की राजनीति में भूचाल
ईडी की याचिका पर होगी कोलकाता हाईकोर्ट में सुनवाई
* ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधी अपील करते हुए कहा, “प्रधानमंत्री जी, कृपया अपने गृह मंत्री को कंट्रोल कीजिए
अजित प्रसाद / सिलीगुड़ी: प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी को लेकर गुरुवार को पश्चिम बंगाल की राजनीति में भूचाल आ गया। कोलकाता में पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमिटी (I-PAC) और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के ठिकानों पर हुई कार्रवाई के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के मौके पर पहुंचने से मामला हाईवोल्टेज ड्रामे और गंभीर कानूनी टकराव में बदल गया।सबूतों से छेड़छाड़ के मामले में ईडी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है, जिस पर आज यानी शुक्रवार को सुनवाई होगी। जस्टिस सुवरा घोष की बेंच केस की सुनवाई करेगी. इसके साथ ही आईपैक ने भी ईडी के सर्च ऑपरेशन को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। इसके अलावा, गुरुवार को ईडी के सर्च ऑपरेशन के खिलाफ प्रतीक जैन के परिवार ने शेक्सपीयर सरानी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करवाई है. ईडी के अधिकारियों पर जैन के परिवार ने अहम दस्तावेजों को चोरी करने का आरोप लगाया है। अब जानें आखिर
* *पूरा मामला क्या है** : मनी लॉन्ड्रिंग के केस में गुरुवार को ईडी ने प्रतीक जैन के घर दफ्तर पर छापेमारी की. बता दें, प्रतीक जैन एक राजनीतिक सलाहकार हैं I-PAC के सह-संस्थापक निदेशक हैं। जैन ही ममता बनर्जी टीएमसी के लिए चुनावों की स्ट्रेटजी तैयार करते हैं। गुरुवार सुबह छह बजे ईडी ने कार्रवाई शुरू की. लेकिन मामला बढ़ा सुबह 11.30 बजे के बाद, जब कोलकाता पुलिस कमिश्नर खुद प्रतीक के आवास पर पहुंच गए थोड़ी ही देर में खुद प्रदेश की मुखिया ममता बनर्जी भी प्रतीक के आवास पर आ गईं। ममता थोड़ी देर बाद जब आवास से निकलीं तो उनके हाथों में हरी रंग की एक फाइल थी। ममता प्रतीक के घर से सीधा I-PAC के दफ्तर भी गईं।
कुल 10 स्थानों पर ईडी ने की कार्रवाई: ईडी का कहना है कि सबूतों के आधार पर कार्रवाई की जा रही है। ये किसी राजनीति या फिर चुनावों से जुड़ा हुआ मामला नहीं है। ये अवैध कोयला तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग हवाला से जुड़ा मामला है। साल 2020 में सीबीआई ने केस दर्ज किया था। ईडी ने कहा कि हमने मामले में पश्चिम बंगाल के छह स्थानों पर दिल्ली के चार ठिकानों पर कार्रवाई की है। पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण पेशेवर ढंग से हो रही थी लेकिन ममता बनर्जी बंगाल पुुलिस के अधिकारियों के आने की वजह से जांच बाधित हुई।
ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधी अपील करते हुए कहा, “प्रधानमंत्री जी, कृपया अपने गृह मंत्री को कंट्रोल कीजिए।” उन्होंने अमित शाह को “नारद मुनि” और “सबसे बुरा गृह मंत्री” बताते हुए आरोप लगाया कि वे विपक्षी दलों को डराने और उनकी चुनावी रणनीतियों को चुराने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर रहे हैं।
ममता ने चेतावनी दी कि अगर भाजपा लोकतांत्रिक तरीके से नहीं लड़ सकती, तो उसे बंगाल आने की जरूरत नहीं है।
साल 2015 में जब प्रशांत किशोर ने भारतीय राजनीति में डेटा और पेशेवर रणनीतियों के महत्व को बढ़ाने के लिए ‘I-PAC’ की नींव रखी, तब प्रतीक जैन इसके शुरुआती और सबसे विश्वसनीय सदस्यों में से एक थे। धीरे-धीरे उन्होंने अपनी काबिलियत के दम पर संस्था में अहम जगह बनाई और वर्तमान में वे I-PAC के सह-संस्थापक और निदेशक की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। प्रतीक जैन को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर एक ‘साइलेंट’ यानी खामोश रणनीतिकार के रूप में जाना जाता है, जो मीडिया की सुर्खियों से दूर रहकर केवल डेटा, जमीनी फीडबैक और डिजिटल अभियानों पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
संवैधानिक विवाद खड़ा कर दिया है कि क्या कोई मुख्यमंत्री छापेमारी की प्रक्रिया के बीच में हस्तक्षेप कर सकती है।
राजनीतिक प्रतिशोध बनाम भ्रष्टाचार की जांच: ED का अपना तर्क जहां एक तरफ ममता बनर्जी इसे “राजनीतिक प्रतिशोध” बता रही हैं, वहीं ED के सूत्रों का कहना है कि यह छापेमारी साक्ष्यों के आधार पर की गई है।अधिकारियों के मुताबिक, यह जांच कोयला घोटाले और नौकरी घोटाले से जुड़े संदिग्ध हवाला लेनदेन और कैश डील्स से संबंधित है। ED का आरोप है कि मुख्यमंत्री ने जांच स्थल पर पहुंचकर साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की है और डिजिटल उपकरणों को जबरन अपने कब्जे में लिया है। एजेंसी का दावा है कि उनके पास इस कार्रवाई के लिए पुख्ता कानूनी आधार और वारंट थे।




