श्रद्धांजलि:मार्क टली सदैव हम पत्रकारों के पथ प्रदर्शक बने रहे !
राजीव कुमार झा
ब्रिटिश ब्राड कास्टिंग कारपोरेशन के लिए भारत से संबंधित समाचार प्रस्तुत करने वाले पत्रकार मार्क टली के देहांत के साथ हमारे देश में मीडिया के एक युग का अंत हो गया। वह जनसंचार की दुनिया में रेडियो युग के महान पत्रकार थे और आपरेशन ब्लू स्टार के अलावा इंदिरा गांधी की हत्या के अलावा अपने समय के तमाम संवेदनशील मुद्दों पर बेहद बेबाकी से रिपोर्टिंग करने के लिए सदैव याद किए जाएंगे।
टेलीविजन से पहले रेडियो का हमारे जीवन के शुरुआती दिनों में काफी प्रभाव रहा। सहरसा में उस समय यह बीबीसी लंदन है… के साथ रेडियो सुनना उस समय हम लोगों के लिए आकाशवाणी पटना के सुबह साढ़े आठ बजे के प्रादेशिक समाचार के अलावा रात्रि पौने नौ बजे के राष्ट्रीय समाचार को सुनने की तरह से ही हमारे रोज के उपक्रमों में शामिल था।
जामिया मिल्लिया इस्लामिया के एमसीआरसी में जब मैं मास कम्युनिकेशन में एम. ए.कर रहा था तो एक दिन अपने स्टूडियो बेस्ड टेलीविजन प्रोग्राम में मैनेजर पांडेय का इंटरव्यू करने के लिए पंकज सिंह से बातचीत करने गया तो बीबीसी के पत्रकारों के बारे में देर तक बातचीत होती रही। मंडी हाउस के गोमती गेस्ट हाउस में प़ंकज सिंह शाम में चाय पीने के लिए आया करते थे। पंकज सिंह ने मेरे कार्यक्रम को प्रस्तुत किया और कुछ साल पहले उनके गुजर जाने का समाचार भी मुझे मिला। मार्क टली से मैं कभी नहीं मिला। बीबीसी हिंदी सर्विस के पत्रकारों में आगे चलकर राजनारायण बिसारिया से एक दिन दिल्ली में मेरी मुलाकात हुई। मैंने उनकी किसी कविता को पढ़कर उन्हें पत्र लिखा था और उन्होंने मुझे वसंत विहार स्थित घर पर मिलने के लिए बुलाया। बिसारिया हिंदी में कविता लेखन करते रहे हैं। किताब घर से उनका काव्य संग्रह देह से विदेह प्रकाशित हुआ है।
उस समय मेरे पास कंप्यूटर नहीं था। वह किसी किताब को तैयार कर रहे थे और मुझे भी अपने प्रोजेक्ट से जोड़ना चाहते थे और उन्होंने मुझे कहा कि आप चाहें तो मेरे किसी परिचित कंप्यूटर विक्रेता से उधार कंप्यूटर खरीद सकते हैं। लेकिन मैं भारतीय ज्ञानपीठ की किताबों को तैयार करने में जुटा था और बिसारिया जी के बुक प्रोजेक्ट में काम करने एक दो दिन ही जा पाया।
मार्क टली को श्रद्धांजलि!



