पश्चिम बंगाल के 7 प्रभावशाली अधिकारियों को चुनाव आयोग ने तत्काल प्रभाव से निलंबित
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले चुनाव आयोग का बड़ा एक्शन देखने को मिला है जहां SIR से जुड़े मामले में भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने पश्चिम बंगाल में सात अधिकारियों को निलंबित कर दिया है और मुख्य सचिव को विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया जुड़े मामले में दुर्व्यवहार, कर्तव्य की उपेक्षा और शक्तियों के दुरुपयोग के लिए उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया है।
चुनाव आयोग ने एक ऐसा कड़ा फैसला लिया है जिसने पूरे प्रशासनिक अमले की नींद उड़ा दी है। चुनावी ड्यूटी में लापरवाही और शक्तियों के दुरुपयोग के गंभीर आरोपों में घिरे पश्चिम बंगाल के 7 प्रभावशाली अधिकारियों को चुनाव आयोग ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई सिर्फ एक निलंबन नहीं है, बल्कि उन सभी लोगों के लिए एक सख्त चेतावनी है जो लोकतंत्र के सबसे बड़े उत्सव में धांधली या मनमानी करने की कोशिश करते हैं।
SIR शक्तियों का दुरुपयोग और गंभीर आरोप
चुनाव आयोग के पास इन अधिकारियों के खिलाफ सबूतों के साथ भारी शिकायतें मिल रही थीं। जांच में पाया गया कि इन अधिकारियों ने न केवल अपनी ड्यूटी में लापरवाही की, बल्कि एसआईआर (SIR) शक्तियों का जमकर दुरुपयोग भी किया। आयोग ने इसे ‘गंभीर कदाचार’ और ‘कर्तव्य की अवहेलना’ करार दिया है। जब जांच में आरोपों की पुष्टि हो गई, तब निर्वाचन आयोग ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 13सीसी के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए इन सभी को घर का रास्ता दिखा दिया। आयोग ने साफ कर दिया है कि चुनावी प्रक्रिया में किसी भी तरह की धांधली को रत्ती भर भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इन 7 अधिकारियों पर गिरी गाज
इस कार्रवाई की जद में मुर्शिदाबाद से लेकर दक्षिण 24 परगना तक के कई कद्दावर नाम आए हैं। निलंबित होने वाले अधिकारियों में मुर्शिदाबाद के समसेरगंज से एईआरओ डॉ. सफी उर्रहमान और फरक्का के एईआरओ नीतीश दास प्रमुख रूप से शामिल हैं। इसके साथ ही मैनागुड़ी की डालिया रे चौधरी और सूती ब्लॉक के एसके मुर्शिद आलम पर भी कड़ी कार्रवाई की गई है। दक्षिण 24 परगना के कैनिंग पुरबो निर्वाचन क्षेत्र से एआरओ सत्यजीत दास और जॉयदीप कुंडू को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। वहीं, डेबरा विधानसभा क्षेत्र के संयुक्त बीडीओ और एआरओ देबाशीष बिस्वास को भी निलंबित किया गया है। इन अधिकारियों पर चुनावी कानूनों के उल्लंघन का गहरा दाग लगा है।
मुख्य सचिव को सख्त निर्देश
सिर्फ निलंबन ही काफी नहीं था, चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को कड़े निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने कहा है कि इन अधिकारियों के खिलाफ उनके संबंधित कैडर कंट्रोलिंग अधिकारियों द्वारा बिना किसी देरी के अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू की जाए। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच की हर अपडेट सीधे उन्हें भेजी जाए। इस कदम से यह साफ हो गया है कि भविष्य में इन अधिकारियों की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं। बंगाल जैसे संवेदनशील राज्य में निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए आयोग ने यह ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की है।
निष्पक्ष चुनाव की दिशा में आयोग का ‘मास्टरस्ट्रोक’
निर्वाचन आयोग के इस फैसले ने राज्य के बाकी अधिकारियों के बीच भी खलबली मचा दी है। एसआईआर प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही या मनमानी के खिलाफ यह अब तक का सबसे बड़ा एक्शन माना जा रहा है। आयोग का कहना है कि वे राज्य में पूरी तरह से निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह कार्रवाई इस बात का प्रमाण है कि चाहे कोई कितना भी बड़ा अधिकारी क्यों न हो, अगर वह कानून के साथ खिलवाड़ करेगा, तो उसे बख्शा नहीं जाएगा।




