दार्जिलिंग के चाय बागान श्रमिकों के हक के लिए उठी आवाज
* कोलकाता के अजय एडवर्ड्स का "ब्लड टी" (Blood Tea) प्रदर्शन
कोलकाता (पश्चिम बंगाल) : दार्जिलिंग के चाय बागान श्रमिकों की दुर्दशा और उनके अधिकारों की मांग को लेकर इंडियन गोरखा जनशक्ति फ्रंट (IGJF) के प्रमुख अजय एडवर्ड्स ने आज कोलकाता की सड़कों पर एक अनोखा और प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन को “ब्लड टी” (रक्त चाय) का नाम दिया गया है, जिसने राहगीरों और प्रशासन का ध्यान अपनी ओर खींचा।अजय एडवर्ड्स ने कोलकाता के व्यस्त इलाके में चाय की प्रतीकात्मक प्याली के साथ विरोध जताते हुए कहा कि दुनिया जिस दार्जिलिंग चाय का आनंद लेती है, उसके पीछे श्रमिकों का खून और पसीना छिपा है।अजय एडवर्ड्स के प्रमुख बयान:चाय की हकीकत: “दार्जिलिंग चाय कोलकाता और पूरी दुनिया के लिए एक ऐश्वर्यशाली और महत्वपूर्ण वस्तु हो सकती है, लेकिन हमारे चाय बागान श्रमिकों के लिए यह उनके खून से सींची गई फसल है।”दासता का आरोप: उन्होंने वर्तमान मजदूरी व्यवस्था पर प्रहार करते हुए कहा, “हमारे श्रमिक आज भी ₹230 की दिहाड़ी में गुलामी की जंजीरों में जकड़े हुए हैं। यह राशि उनके जीवनयापन के लिए अपर्याप्त है।”संवैधानिक अधिकार: उन्होंने पुरजोर तरीके से कहा कि “न्यूनतम मजदूरी (Minimum Wage)” श्रमिकों का कानूनी हक और अधिकार है, जिसे सरकार को तुरंत लागू करना चाहिए।
विधानसभा चुनाव 2026 के करीब आते ही, पहाड़ की राजनीति अब कोलकाता के गलियारों तक पहुँच गई है। अजय एडवर्ड्स का यह प्रदर्शन सीधे तौर पर राज्य सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति मानी जा रही है। उन्होंने साफ कर दिया कि जब तक चाय श्रमिकों को उनका हक नहीं मिलता, तब तक उनका यह प्रतीकात्मक और जमीनी संघर्ष जारी रहेगा।मुख्य मांगें:चाय बागान श्रमिकों के लिए राज्य सरकार द्वारा तय ‘न्यूनतम मजदूरी’ लागू करना।बागान श्रमिकों को भूमि का अधिकार (Parcha Patta) देना।₹230 की दिहाड़ी में तत्काल और सम्मानजनक वृद्धि करना।



