जान बची, पैर खोया, पुलिस लापरवाह
-नामजद आरोपियों को पुलिस नहीं कर रही गिरफ्तार
-घायल का सफदरजंग अस्पताल में चल रहा इलाज
-दोस्तों ने शराब पिलाकर वारदात को दिया अंजाम
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की लापरवाही कहिए या सुस्त चाल या कुछ और, घटना के बारह दिन बाद एफआईआर दर्ज होता है और पंद्रह दिन तक नामजद आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया जाता है। घायल मोहित का फिलवक्त सफदरजंग अस्पताल में इलाज चल रहा है। घायल मोहित का एक पैर काट दिया गया है और संभवतः दूसरे पैर को भी काटने की संभावना है। आरोपी पुलिस पकड़ से दूर मजे में घूम रहे हैं।
घटनाक्रम यूं है कि पिछले महीने 25 अप्रैल को हनुमान मंदिर, गली नंबर-3/6, मुकुन्दपुर जनता बिहार निवासी मोहित पिता रुप लाल वर्मा अपने दोस्त मोनू की शादी में शरीक होने के लिए अपने दूसरे दोस्त दीपांशु के साथ घर से अपनी बाइक से और दीपांशु स्कूटर से निकला। कुछ दूर बाद में एक और दोस्त राहुल साथ हो लिया। जब सभी दोस्त संजय गांधी टांसपोर्ट नगर वर्द्धमान प्लाजा वाईपास पहुंचा तो दीपांशु के दो और दोस्त हर्ष व गुलशन शामिल हो गए। पांचों मित्र मंडली ने आपस में पैसे जमा कर शराब और खाने का सामान मंगाया। वहीं पांचों ने जमकर शराब का सेवन किया।
शराब का नशा जब खूब चढ़ गया तो पांचों दोस्त आपस में मारपीट करने लग गए। मारपीट का सारा नजारा सीसीटीवी में दर्ज है। घटनास्थल जगतराम चौक मुकुन्दपुर पर के सीसीटीवी में साफ-साफ दिख रहा कि चार-पांच लड़के आपस में मारपीट कर रहे हैं, लेकिन कोई राहगीर उन्हें छुड़ाने की जहमत नहीं उठाते नजर आ रहे हैं। मारपीट के बाद मोहित के दोस्तों ने उसे सब्जी मंडी थाना क्षेत्र के रेलवे पटरी पर छोड़ आया कि रेल से कटने को दर्शा कर घटना का रुख मोड़ा जा सके। वहां भी दोस्तों ने मोहित की जमकर पिटाई की। उसके दोनों पैरों को तोड़ दिया और वहां से भाग खड़े हुए। घटना की जानकारी मिलते ही रेलवे पुलिस ने मोहित को नजदीकी रोहिणी स्थित डॉ अम्बेडकर अस्पताल पहुंचाया। वहां से मोहित को करोल बाग स्थित बी एल कपूर अस्पताल ले जाया गया। वहां से मोहित को शालीमार बाग स्थित मैक्स अस्पताल रेफर कर दिया गया। यहां से भी प्राथमिक उपचार के बाद मोहित को सफदरजंग अस्पताल रेफर कर दिया। सफरजंग अस्पताल में इलाज के दौरान मोहित का पैर इसलिए काटना पड़ा क्योंकि सभी दोस्तों ने मोहित के दोनों पैरों को बुरी तरह से जख्मी कर दिया था। अस्पताल के डाक्टरों को मोहित की जान बचाने के लिए तत्काल एक पैर को काटना पड़़ा। संभावना यह है कि मोहित के दूसरे पैर को भी काटना न पड़े क्योंकि इंफेक्शन पूरे शरीर में फैलने की आशंका है।
उपरोक्त संक्षिप्त घटनाक्रम में पुलिस की भूमिका संदिग्ध है कि मोहित को अगर पुलिसकर्मी समय पर अस्पताल ले जाते तो पैर काटने की नौबत नहीं आती। पुलिस पर सवाल यह भी बनता है कि अभी तक नामजद आरोपियों को पकड़ा नहीं गया है न ही घटना की ठीक से तफ्तीश की गई है। सभी साथियों द्वारा शराब पिलाना और मारपीट कर रेलवे पटरी पर फेंक देना बहुत बड़ा राज को छिपाए हुए लगता है। इन लोगों की उससे क्या दुश्मनी थी। पुलिस की लापरवाही इंगित करता है कि दाल में कहीं काला है।

