12 साल बाद भी अधूरा है चंदवारा पुल
-उद्घाटन से पहले आई रिपेयरिंग की नौबत
-फंड की कमी के कारण बार.बार रुकता रहा काम
-45 करोड़ का पुलए एप्रोच रोड और मुआवजे पर 120 करोड़ खर्च
भारत पोस्ट संवाददाता
नई दिल्ली। मुजफ्फरपुर जिले के उत्तरी.पूर्वी इलाके से शहर को जोड़ने वाली दूसरी लाइफलाइन चंदवारा पुल की दास्तां व्यवस्था की सुस्ती का उदाहरण बन चुकी है। जिस पुल की आधारशिला साल 2014.15 में इस उम्मीद के साथ रखी गई थी कि यह शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को रफ्तार देगा, वह 12 साल बाद भी उद्घाटन की राह देख रहा है। विडंबना देखिए कि एक तरफ जहां अब जाकर एप्रोच रोड का निर्माण कार्य चल रहा है, वहीं दूसरी तरफ उद्घाटन से पहले ही नए पुल की रेलिंग जर्जर होने लगी है और उसकी मरम्मत की जा रही है।
चंदवारा पुल के निर्माण में हुई इस अप्रत्याशित देरी के पीछे तकनीकी गड़बड़ी से लेकर प्रशासनिक लेटलतीफी के कई पेंच फंसे रहे, जिसे सिलसिलेवार ढंग से इस तरह समझा जा सकता है। शुरुआत में इस परियोजना को वर्ष 2017.18 तक ही पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया था। लेकिन निर्माण के दौरान ही पुल का पाया ;पिलरद्ध टेढ़ा होने और बहने जैसी गंभीर तकनीकी दिक्कतें सामने आ गईं। इस बड़ी तकनीकी लापरवाही ने पूरी योजना को कई साल पीछे धकेल दिया। पुल और एप्रोच रोड के लिए साल 2015 में ही लीज पर जमीन लेने का फैसला हुआ था। लेकिन जमीन मालिकों के साथ सहमति नहीं बन पाने के कारण रजिस्ट्री की प्रक्रिया सालों.साल लटकी रही।
पुल निर्माण में देरी की एक बड़ी वजह यह भी रही कि इसके निर्माण और मुआवजा भुगतान के लिए राशि एकमुश्त मिलने के बजाय तीन.चार चरणों में टुकड़ों.टुकड़ों में मिली। फंड की कमी के कारण बार.बार काम रुकता रहा।
सालों तक फाइलों में दबे रहने के बाद साल 2021 में एक बार फिर जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया नए सिरे से शुरू की गई। इसके बाद साल 2024 में अवार्ड घोषित हुआ और जमीन मालिकों को मुआवजा भुगतान का रास्ता साफ हुआ। हाल के दिनों में श्प्रगति यात्रा और जिला प्रशासन की सख्त हिदायतों के बाद आखिरकार इस ठप पड़े प्रोजेक्ट के काम में तेजी आई है।
चंदवारा पुल परियोजना के निर्माण में सिर्फ समय ही नहीं लगाए बल्कि वक्त के साथ इसकी लागत का गणित भी बदलता चला गया। यह पूरी परियोजना दो अलग.अलग हिस्सों और बजट में बंटी हुई है, जिसमें मुख्य पुल से कहीं अधिक खर्च इसके एप्रोच रोड ;संपर्क पथद्ध और जमीन अधिग्रहण पर हो रहा है। शुरुआत में इस पुल के निर्माण की अनुमानित लागत करीब 45 करोड़ रुपये थी। फेज.2 एप्रोच पथ ;जेल चौक से सिपाहपुर इस संपर्क पथ के निर्माण और जमीन अधिग्रहण की कुल लागत करीब 120 करोड़ रुपये तय की गई है। इसमें से अकेले 57 से 58 करोड़ रुपये सिर्फ रैयतों ;जमीन मालिकों. को मुआवजा देने पर खर्च हो रहे हैंए जिसके लिए प्रशासन द्वारा हाल ही में राशि भी आवंटित कर दी गई।
चंदवारा पुल और इसके दोनों फेज के एप्रोच रोड बन जाने से जिला समेत उत्तर बिहार को कई बड़े लाभ मिलेंगे। मसलन वर्तमान में दरभंगा या एनएच.57 की तरफ से आने वाले वाहनों को शहर में प्रवेश करने के लिए अखाड़ाघाट पुल या जीरो माइल से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे भारी जाम लगता है. इस पुल के चालू होने से गाड़ियां सीधे शहर के अंदरूनी हिस्सों में प्रवेश कर सकेंगी। मुजफ्फरपुर के पूर्वी इलाके के लोगों को एनएच.57 से सीधा जुड़ाव मिल जाएगा। इससे मुजफ्फरपुर से दरभंगा जाने वाले लोगों की दूरी करीब 10 से 15 किलोमीटर तक कम हो जाएगी, जिससे समय और ईंधन दोनों की बचत होगी।
चंदवारा पुल के फेज.1 के एप्रोच पथ का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है और इसे जल्द ही पूरा कर लिया जाएगाै जहां तक फेज.2 ;जेल चौक से सिपाहपुर’ के एप्रोच रोड का सवाल हैए तो इसके लिए जमीन अधिग्रहण के एस्टीमेट को प्रशासनिक स्वीकृति दे दी गई है। इसके लिए आवश्यक राशि भी विभाग द्वारा उपलब्ध करा दी गई है और वर्तमान में प्रभावित जमीन मालिकों को मुआवजा भुगतान करने की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। जिला प्रशासन का लक्ष्य है कि अगले साल मार्च तक फेज.2 के एप्रोच रोड का काम हर हाल में पूरा करा लिया जाए, ताकि आम लोगों को इस दूसरी लाइफलाइन का लाभ मिल सके।




