पटना की युवा लेखिका अंबिका कुशवाहा ‘अंबी’ से राजीव कुमार झा की बातचीत…

साहित्य:साक्षात्कार

प्रश्न:साहित्य लेखन करते हुए क्या महसूस करती हैं?

उत्तर : साहित्य लेखन कार्य से मुझे मानसिक शांति अनुभव होती है। जब भी किसी मुद्दे पर अपने अनुभव, भावनाओं और विचारों को लेखन द्वारा व्यक्त करती हूं, और समाज के बीच मेरी बातें पहुँचती हैं तो आत्मिक सुकून महसूस होता है। लेखन कार्य मेरे लिए प्रेम, आनंद, विषाद एवं मनोरंजन का संगम है। साहित्य समाज का आईना भी होता है। यही वजह है कि साहित्य मेरे लिए शौक मात्र नहीं, बल्कि आत्म-अभिव्यक्ति और समाज से जुड़ाव का एक सशक्त माध्यम है।

प्रश्न:आपके मन में हिंदी लेखन के प्रति लगाव कैसे पैदा हुआ?

उत्तर : हिंदी लेखन के प्रति मेरा लगाव बचपन से ही रहा। स्कूल एवं कॉलेज की पढ़ाई भी हिंदी माध्यम से पूरी हुई। बचपन में मुझे हिंदी कहानियां एवं कॉमिक्स पढ़ने का और अपनी डायरी में छोटी छोटी पंक्तियां लिखने का शौक रहा था। प्रेमचंद की गोदान एवं कर्मभूमि की पुस्तके मैंने तीसरी कक्षा में ही समाप्त कर दी थी। ऐसा होता है ना कि जो कम बोलते हैं, वो लिखते ज्यादा हैं और रचनात्मकता हमारी आत्मा का अंश है। इस तरह मैं भी अपने विचारों और भावनाओं को पन्नों पर लिखकर व्यक्त करने लगी। हिंदी मेरी मातृभाषा होने के साथ-साथ मेरी आत्मा की भाषा भी है। इसमें जो भावनाओं की गहराई और सरलता है, वह मुझे किसी और भाषा में नहीं मिलती। मुझे अपनी जड़ों से जुड़ा रहना पसंद है।

प्रश्न:अपने बचपन माता – पिता घर परिवार और वर्तमान समय के बारे में बताइए?

उत्तर:मेरा जन्म बिहार की राजधानी पटना में उच्च मध्यवर्गीय परिवार में हुआ। मेरे पिता जी बैंक में अफसर थे। लेकिन मेरी बदकिस्मती की जब मैं पांच वर्ष की थी, तो पिता जी का देहांत हो गया। पिता के अभाव में मेरा बचपन बहुत जल्दी खत्म हो गया और उसके साथ ही निजी जीवन संघर्षों से भरा रहा। निजी जीवन की चर्चा मैं कभी और अपनी कहानी में करूंगी। खालीपन और जीवन संघर्ष ने मुझे लिखना सिखाया और आज मैं वर्तमान में लेखन के माध्यम से अपनी आवाज़ को मजबूत बना रही हूँ और समाज के साथ ही जीवन के उन संघर्षों को शब्दों में उतार रही हूँ।

प्रश्न:अपने प्रिय लेखकों के बारे में जानकारी दीजिए।

उत्तर :मेरे प्रिय लेखकों में सबसे ऊपर मुंशी प्रेमचंद हैं। उनकी कहानियाँ जैसे ‘ईदगाह’ और ‘कफन’ अनमोल हैं। उन्होंने अपने नोबेल कर्मभूमि, गोदान और रंगभूमि में सामाजिक यथार्थ, गरीबी और मानवीय संवेदना को जिस सच्चाई से लिखा भुला नहीं जा सकता है। नारीवादी स्वर महादेवी वर्मा मेरी पसंदीदा लेखिका हैं। इनकी काव्य रचना में एक अलग की ओज है। इसके अलावा मुझे रामधारी सिंह दिनकर, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला और हरिवंश राय बच्चन जी की रचनाएं पसंद हैं। पसंदीदा रचनाकारों की सूची लंबी हो सकती है क्योंकि जिनकी रचनाएं हृदय में निवास करें, वो पसंदीदा ही होते हैं। वर्तमान के चर्चित युवा लेखक नृपेंद्र अभिषेक नृप एवं लेखिका सुषमा गुप्ता की रचनाएं भी पसंद हैं।

प्रश्न,:साहित्य लेखन के अलावा अपनी अन्य अभिरुचियों के बारे में बताएं?

उत्तर : मुझे नोवेल, कहानियां, ऐतिहासिक, कविताएं जैसी पुस्तकें पढ़ना पहली पसंद है। मुझे समाज में जरूरतमंद की मदद करना और ऐतिहासिक जगहों एवं प्रकृति की गोद में घूमना अच्छा लगता हैं।

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