घाघरा का कहर : अपने ही हाथों उजाड़ रहे आशियाना
-गोपालनगर टांडी में बेबस ग्रामीणों का प्रशासन पर फूटा गुस्सा
भारत पोस्ट संवाददाता
गोपाल नगर। घाघरा नदी का रौद्र रूप गोपाल नगर टांडी के लोगों के लिए किसी अभिशाप से कम नहीं रह गया है। कटान की जद में आए परिवार अब अपने ही हाथों से वर्षों की मेहनत से बनाए घरों को तोड़ने को मजबूर हैं। कोई छत की टीन उतार रहा है, कोई दरवाजे.खिड़कियां निकाल रहा है तो कोई ईंटें बचाने की जुगत में लगा है। जिन आंगनों में कभी बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, वहां अब सिर्फ आंसू, मलबा और बेबसी दिखाई दे रही है।
गोपाल नगर टांडी में कई मकान नदी में समा चुके हैं, जबकि कई परिवार अपने घर खुद तोड़कर सुरक्षित स्थानों पर सामान पहुंचाने में जुटे हैं। लोगों का कहना है कि अगर मकान नहीं तोड़ेंगे तो नदी सब कुछ निगल जाएगी. इसलिए मजबूरी में अपनी ही दुनिया को उजाड़ना पड़ रहा है। एक बुजुर्ग ग्रामीण ने नम आंखों से कहा जिस घर को जिंदगी भर की कमाई से बनाया। आज उसी को अपने हाथों से तोड़ रहे हैं. इससे बड़ा दुख क्या होगा?’
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन के अधिकारी कई बार दौरा कर चुके हैं। लेकिन कटान रोकने के लिए अब तक कोई स्थायी और प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। लोगों का कहना है कि हर बार सिर्फ आश्वासन मिलता है, लेकिन हालात पहले से भी ज्यादा खराब होते जा रहे हैं। ग्रामीणों ने कहा, अधिकारी आते हैं, फोटो खिंचवाते हैं और चले जाते हैं। कटान रोकने का इंतजाम आज तक नहीं हुआ।
कटान पीड़ितों का गुस्सा जनप्रतिनिधियों पर भी साफ दिखाई दिया। ग्रामीणों ने कहा कि चुनाव के समय हर नेता गांव में दिखाई देता है, लेकिन संकट की इस घड़ी में कोई साथ खड़ा नहीं है। एक महिला ने कहा,’वोट मांगने सब आए थे, लेकिन अब हमारा घर उजड़ रहा है तो कोई हाल पूछने तक नहीं आया। क्या हम इस जिले के नागरिक नहीं हैं?
कटान पीड़ितों का कहना है कि उन्हें सिर्फ राहत सामग्री नहीं, बल्कि स्थायी सुरक्षा चाहिए। ग्रामीणों ने मांग की कि नदी किनारे तत्काल मजबूत कटानरोधी कार्य कराया जाए। विस्थापित परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए और सुरक्षित स्थान पर पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।




