जलवायु परिवर्तन से खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका पर गंभीर प्रभाव: मुर्मु
डॉ. समरेंद्र पाठक
वरिष्ठ पत्रकार
नयी दिल्ली,21सितंबर2026 राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कहा है,कि जलवायु परिवर्तन से खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका पर गंभीर प्रभाव सामने आ रहे हैं।
श्रीमती मुर्मु कल यहां राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा “पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन का भविष्य” विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित कर रही थीं।
राष्ट्रपति ने कहा कि जलवायु परिवर्तन मानव अस्तित्व के अनेक स्तरों पर असंतुलन पैदा करता है। जैव-विविधता का ह्रास, जल संकट और भू-क्षरण जैसी समस्याएं इससे गहराई से जुड़ी हुई हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसी जटिल चुनौती का समुचित प्रकार से सामना करने के लिए नीतियों और कार्रवाई का एक सुगठित ढांचा आवश्यक है। ऐसी व्यवस्था, जिसमें केवल सरकारें और कानूनी विशेषज्ञ ही नहीं, बल्कि वे समुदाय भी सक्रिय रूप से भागीदार हों, जिनको जलवायु परिवर्तन सर्वाधिक प्रभावित करता है।
राष्ट्रपति ने कहा कि ग्रामीण और वनवासी समाज, छोटे किसान, महिलाएं, तथा अन्य कमजोर वर्गों की आवश्यकताओं के प्रति विशेष संवेदनशीलता आवश्यक है, क्योंकि प्राकृतिक आपदाओं का सबसे अधिक प्रभाव इन्हीं पर पड़ता है।
राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि पारंपरिक ज्ञान प्रणालियां, स्थानीय समुदायों की प्रथाएं और उनके जीवन के अनुभव जलवायु अनुकूलन की क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि हमें पारंपरिक ज्ञान पर आधारित लोक- केन्द्रित एवं समुदाय आधारित अनुकूलन तरीकों के माध्यम से जलवायु परिवर्तन का सामना करने की क्षमता को सुदृढ़ करने के प्रयास करने चाहिए।
उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन का सामना करने की क्षमता को बढ़ाने में संधारणीय वनीकरण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। जैव विविधता का पोषण करने वाला और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप वनीकरण इसमें सहायक हो सकता है।
राष्ट्रपति ने कहा कि संधारणीय वनीकरण का वास्तविक लक्ष्य केवल “पेड़ लगाना” नहीं, बल्कि स्वस्थ और स्वनिर्भर पारिस्थितिक तंत्रों को फिर से स्थापित करना है।
