टाटा पावर-डीडीएल ने दिल्ली-पानीपत-करनाल नमो भारत (आरआरटीएस) कॉरिडोर के निर्माण में सहयोग करने के लिए नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कार्पोरेशन लिमिटेड के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर किए हस्ताक्षर
न्यू दिल्ली, टाटा पावर-डीडीएल ने आगामी दिल्ली-पानीपत-करनाल नमो भारत (आरआरटीएस) कॉरिडोर पर इलेक्ट्रिकल यूटिलिटीज़ के स्थानांतरण में सहायता के लिए नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कार्पोरेशन लिमिटेड (एनसीआरटीएस) के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।
दिल्ली-पानीपत-करनाल नमो भारत (आरआरटीएस) कॉरिडोर की लंबाई लगभग 136.3 किलोमीटर है और इस पर कुल-मिलाकर 21 स्टेशन हैं – 6 दिल्ली और 15 हरियाणा में स्थित हैं। इस कॉरिडोर के चालू होने के बाद एनसीआर के बाशिन्दों को निर्बाध और तेज रफ्तार ट्रांसपोर्ट सिस्टम का लाभ मिलेगा। नमो भारत ट्रेन अधिकतम 180 किलोमीटर/घंटे की रफ्तार से दौड़ सकती है, इसकी सामान्य औसत रफ्तार 160 किमी/घंटा होगी और हर 5 से 10 मिनट की ट्रेन फ्रीक्वेंसी होगी। कॉरिडोर में 124.82 किमी एलीवेटेड और 11.48 किमी अंडरग्राउंट ट्रैक शामिल हैं।
टाटा पावर-डीडीएल की ओर से सुश्री किरण गुप्ता (चीफ – कस्टमर एक्सपीरियेंस, कमर्शियल एंड कॉपोर्रेट कम्युनिकेशंस) तथा एनसीआरटीसी की ओर से श्री विजय कुमार, कंपनी सचिव ने श्री राहुल कुमार, हैड – एससीएम, श्री अनुराग खुराना, एचओडी (जी एंड आई, एनबीएस एंड इलेक्ट्रिफिकेशन) समेत दोनों संगठनों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए।
इस राष्ट्रीय महत्व की पहल की भारत सरकार के पीएमजी पोर्टल के माध्यम से निगरानी की जा रही है। एमओयू के प्रावधानों के अनुसार, टाटा पावर-डीडीएल इस संबंध में आवश्यक निगरानी करने के साथ-साथ ईएचवी/एचटी/एलटी इलेक्ट्रिकल नेटवर्कों की शिफ्टिंग/रीलोकेशन संबंधी मंजूरियां प्रदान करेगा ताकि प्रस्तावित दिल्ली-पानीपत-करनाल नमो भारत (आरआरटीएस) कॉरिडोर पर बेरोकटोक तरीके से काम चलता रहे और साथ ही, सुरक्षा, विश्वसनीयता तथा वैधानिक मानकों का भी पालन सुनिश्चित किया जाए।
इस कॉरिडोर में including 765 kV, 400 kV, 132 kV, 66 kV समेत 38 EHV ट्रांसमिशन लाइनें हैं जबकि 33 kV, 11 kV and 415 V पर भी कई लाइनें हैं। इनके अलावा, अन्य कई बिजली उपकरण जैसे ट्रांसफॉर्मर आदि भी शामिल हैं। इन सुविधाओं का प्रबंधन बीएसईएस, टाटा पावर-डीडीएल, यूएचबीवीएनएल, एचवीपीएनएल, पावर ग्रिड, बीबीएमबी, और जेकेटीपीएल समेत कई एजेंसियों द्वारा किया जाता है, और प्रस्तावित कॉरिडोर पर निर्माण कार्य के मद्देनज़र, इन्हें स्थानांतरित या पुनःस्थापित करने की आवश्यकता है।
यह महत्वपूर्ण समझौता राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में बड़े पैमाने पर स्थापित होने वाली इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए इंटर-एजेंसी तालमेल को मजबूत बनाने की दिशा में उठाया गया बड़ा कदम है। यह सस्टेनेबल अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर को साकार करने, कुशल मोबिलिटी सॉल्यूशंस को सपोर्ट करने, तथा विद्युत वितरण नेटवर्क की विश्वसनीयता एवं एकसूत्रता को सुरक्षित रखते हुए, महत्वपूर्ण पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का समय पर तैयार करने की टाटा पावर-डीडीएल की प्रतिबद्धता दर्शाता है।
इस गठबंधन के बारे में, सुश्री किरण गुप्ता (चीफ – कस्टमर एक्सपीरियेंस, कमर्शियल एंड कॉपोर्रेट कम्युनिकेशंस, टाटा पावर-डीडीएल ने कहा, “एनसीआरटीसी कॉरिडोर बड़े पैमाने की इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना है जो क्षेत्रीय स्तर पर कनेक्टिविटी को नए सिरे से परिभाषित करते हुए आर्थिक विकास में तेजी लाएगी। टाटा पावर-डीडीएल में, हम समय पर और कुशल तरीके से नेटवर्क शिफ्टिंग के माध्यम से इस राष्ट्रीय स्तर के अभियान में सहायता दे रहे हैं, जो उपभोक्ताओं के लिए भरोसेमंद बिजली सप्लाई जारी रखते हुए इस परियोजना को साकार रूप देगा। हमारे प्रयास राष्ट्र-निर्माण तथा भविष्य की पीढ़ियों को सशक्त बनाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की दिशा में होने वाले तैयारियों को लेकर हमारी प्रतिबद्धता दर्शाते हैं।”
यूटिलिटी शिफ्टिंग का काम शुरू होने के बाद लगभग एक वर्ष के भीतर पूरा करने का अनुमान है।



