एनबीसीसी: विकास गाथा

सरकारी अवसंरचना में अपनी विशेषज्ञता के लिए प्रसिद्ध एनबीसीसी ने उच्चतम न्यायालय के निदेश के बाद और लर्नेड कोर्ट रिसीवर के मार्गदर्शन में आम्रपाली की अटकी हुई परियोजनाओं का पुनरुद्धार करने का वृहद कार्य प्रारंभ किया। एनबीसीसी को अधूरी इमारतें, कानूनी बाधाएं और त्रुटिपूर्ण दस्तावेज़ जैसी कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ा। फिर भी, उनके प्रयासों से निर्माण कार्य न केवल पुनः प्रारंभ हुआ बल्कि हजारों प्रभावित घर खरीदारों का विश्वास भी दोबारा प्राप्त हुआ।
आम्रपाली परियोजनाओं का पुनरुद्धार करना एनबीसीसी के लिए एक बड़ी चुनौती थी। कोविड-19 महामारी के कारण कार्य बाधित हुआ, वित्तपोषण प्राप्त करना कठिन हो गया तथा खरीदारों का योगदान असंगत था। कानूनी बाधाएं, अधूरे दस्तावेज़ और अनुमोदनों की कमी के कारण प्रगति में और देरी हुई। अधिवासित (आक्यूपाइड) सोसायटियों में निर्माण कार्य में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, जिसमें सीमित शटडाउन विंडोज़ और अवसंरचना के हस्तांतरण में देरी शामिल थी।
कई अधूरी इकाइयां क्षतिग्रस्त हो गई थीं जिन्हें गुणवत्तापूर्ण जीर्णोद्धार की आवश्यकता थी। आम्रपाली ब्रांड की बदनामी के कारण अनबिकी मालसूची को बेचना कठिन हो गया था तथा प्रदूषण संबंधी प्रतिबंधों के कारण निर्माण कार्य अक्सर रुक जाता था। इस दौरान एनबीसीसी को परियोजना के पूर्ण होने में खरीदार का विश्वास और भरोसा दोबारा कायम करने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ी।
एनबीसीसी ने परियोजना प्रबंधन, इंजीनियरी और वित्तीय पुनर्गठन में अपनी मजबूत विशेषज्ञता के माध्यम से आम्रपाली परियोजनाओं का पुनरुद्धार करने की चुनौतियों पर नियंत्रण प्राप्त किया। परियोजना की स्थिति का आकलन करने, संरचनात्मक मुद्दों को हल करने और गुणवत्ता अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए एक व्यवस्थित और अनुशासित दृष्टिकोण अपनाया गया। मिवान शटरिंग जैसी उन्नत निर्माण तकनीकों का उपयोग किया गया तथा एनआईटी-जालंधर और वीएनआईटी-नागपुर जैसी एजेंसियों द्वारा तृतीय पक्ष गुणवत्ता निरीक्षण संपन्न कराए गए। उच्च निर्माण मानक बनाए रखने के लिए श्रमिकों और इंजीनियरों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया।
वित्तपोषण संबंधी मुद्दों से निपटने के लिए, एनबीसीसी ने माननीय उच्चतम न्यायालय की निगरानी वाली समिति द्वारा संस्वीकृत सार्वजनिक नोटिस सहित, डिफॉल्टरों से भुगतानों को प्रोत्साहित करने के लिए लर्नेड कोर्ट रिसीवर के साथ मिलकर कार्य किया। अनबिकी इकाइयों और एफएआर की बिक्री शुरू की गई तथा मालसूची की बिक्री में तेजी लाने के लिए तृतीय पक्ष के परामर्शदाताओं को नियोजित किया गया। इन प्रयासों से नकदी प्रवाह में सुधार हुआ, जो परियोजना निष्पादन में एक बड़ी अड़चन थी।
लर्नेड कोर्ट रिसीवर और एनबीसीसी टीम के प्रयासों के कारण महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता अर्जित हुई। एसबीआईकैप वेंचर्स लिमिटेड ने 650 करोड़ रुपये का वित्तपोषण संस्वीकृत किया। वर्तमान में एसबीआईकैप को ऋण की चुकौती कर दी गई है। इसके अलावा, 1500 करोड़ रुपये के वित्तपोषण के लिए 07 बैंकों अर्थात् बैंक ऑफ बड़ौदा (लीड बैंक), इंडियन बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, यूको बैंक, बैंक ऑफ इंडिया और पंजाब एंड सिंध बैंक का एक सह-संघ गठित किया गया। बैंकों के सह-संघ के ऋण की चुकौती मार्च, 2024 से शुरू हो चुकी है।
इन उपायों के परिणामस्वरूप, लगभग 25,000 इकाइयां पूर्ण हो चुकी हैं और हजारों इकाइयां घर खरीदारों को सुपुर्द कर दी गई हैं, जो आम्रपाली परियोजनाओं के पुनरुद्धार में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।एनबीसीसी ने 17 परियोजनाएं पूर्ण की हैं, जिनमें नोएडा में ईडन पार्क, सफायर-1, सफायर-2, प्रिंसली एस्टेट, सिलिकॉन सिटी-1, सिलिकॉन सिटी-2, प्लेटिनम और टाइटेनियम, जोडिएक, ग्रेटर नोएडा में कैसल, लेज़र वैली विलाज, सेंचुरियन पार्क लो राइज और ओ2 वैली, किंग्सवुड, लेज़र पार्क, गोल्फ होम्स, ड्रीम वैली विला, ड्रीम वैली एनचांटे और गुरुग्राम में आईएमटी मानेसर शामिल हैं।
आम्रपाली में नई परियोजना का शुभारंभ
हाल ही में एनबीसीसी ने आम्रपाली की कुल 4024 रिहायशी इकाइयों (10.49 मिलियन वर्ग फीट का बिक्री योग्य क्षेत्रफल) वाली 4 नई एफएआर परियोजनाओं – (एस्पायर गोल्फ होम्स, एस्पायर सेंचुरियन पार्क, एस्पायर ड्रीम वैली और एस्पायर लीज़र पार्क) के लिए ई-नीलामी सफलतापूर्वक पूर्ण की है, जिनका कुल बिक्री मूल्य 8227.92 करोड़ रुपये है। ये ई-नीलामियां अटकी हुई आम्रपाली परियोजनाओं को पूर्ण करने में अहम सिद्ध होंगी और कई घर खरीदारों का अपना घर होने के सपने को पूरा करेगी। मौजूदा इकाइयां पूरी हो जाने पर, एकत्रित धनराशि से नोएडा/ग्रेटर नोएडा की अटकी हुई परियोजनाओं की संख्या में भी काफी कमी आएगी।
प्रेरणादायक नेतृत्व
एनबीसीसी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक श्री के.पी. महादेवास्वामी ने पहले आम्रपाली परियोजनाओं में परियोजना प्रमुख के रूप में कार्य किया था और अब वे अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक के रूप में एनबीसीसी के प्रमुख हैं। उनके प्रयासों से एचएससीएल घाटे वाली कंपनी से मिनीरत्न संगठन में परिवर्तित हुई। आम्रपाली परियोजनाओं के सफल कार्यान्वयन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसी प्रकार एनबीसीसी ने पुनर्विकास परियोजनाओं में प्रगति की है। एनबीसीसी अब इस मॉडल को नई दिल्ली के अलावा कई अन्य राज्यों में ले जाने की तैयारी में है।
दिल्ली में पुनर्विकास परियोजनाएं
शहरी पुनर्विकास में एनबीसीसी की दीर्घकालिक विरासत है। एनबीसीसी, भारत सरकार की एक प्रमुख कार्यान्वयन एजेंसी है तथा हाल ही में इसे सरकारी संपत्तियों के पुनर्विकास का दायित्व सौंपा गया है। जीपीआरए कॉम्प्लेक्स, न्यू मोती बाग, नई दिल्ली नामक पहली पुनर्विकास परियोजना – जो कि भारत में अपनी तरह का आईजीबीसी प्रमाणित सबसे बड़ा ग्रीन होम कॉम्प्लेक्स है और ईस्ट किदवई नगर, नई दिल्ली के पुनर्विकास से शुरुआत करते हुए, कंपनी अब नई दिल्ली में नौरोजी नगर, सरोजिनी नगर एवं नेताजी नगर सहित कई ऐसी परियोजनाओं पर कार्य कर रही है। ये परियोजनाएं नवोन्मेषी डिज़ाइन, संधारणीय कार्यपद्धतियों और समुदाय-केंद्रित विकास के प्रति एनबीसीसी की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। भारत सरकार ने शहरी क्षेत्रों के रूपांतरण में एनबीसीसी के समृद्ध अनुभव को देखते हुए उसे 7 जीपीआरए कॉलोनियों के पुनर्विकास का महत्वपूर्ण कार्य सौंपा है। एनबीसीसी नौरोजी नगर, सरोजिनी नगर और नेताजी नगर का पुनर्विकास कर रहा है जबकि सीपीडब्ल्यूडी अन्य चार कॉलोनियों, अर्थात कस्तूरबा नगर, त्यागराज नगर, श्रीनिवासपुरी और मोहम्मदपुर का निष्पादन कर रहा है। सीपीडब्ल्यूडी द्वारा निष्पादित इन चार परियोजनाओं को पुनर्विकास के लिए एनबीसीसी को आबंटित कॉलोनियों के वाणिज्यिक स्थान की बिक्री के माध्यम से एनबीसीसी द्वारा जनित धनराशि से वित्त पोषित किया जा रहा है।
मजबूत ऑर्डर बुक और राजस्व वृद्धि
125,000 करोड़ रुपये (समेकित) से अधिक मूल्य की ऑर्डर बुक के साथ, एनबीसीसी को आने वाले वर्षों में निरंतर वृद्धि की उम्मीद है। कंपनी ने वित्त वर्ष 23 में ₹8,900 करोड़ का राजस्व दर्ज किया, तत्पश्चात वित्त वर्ष 24 में ₹10,666 करोड़ का राजस्व दर्ज किया एवं इस वित्त वर्ष में अपने लक्ष्यों को पूरा करने की उम्मीद रखता है।भावी दृष्टिकोण
वृहद पैमाने वाले पुनर्विकास की दिशा में एनबीसीसी की कार्यनीतिक पहल, इसका प्रमाणित वित्तपोषण मॉडल और भारतीय राज्यों में उपस्थिति का विस्तार, कंपनी को भारत के शहरी अवसंरचना के रूपांतरण में एक अग्रणी संस्थान के रूप में स्थापित करता है। स्पष्ट विकास पथ और बढ़ती हुई राज्य भागीदारी के साथ, कंपनी और अधिक ऊंचाइयों को प्राप्त करने की राह पर अग्रसर है।

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