मेहंदी लगी थी हाथों में… पर बारात नहीं आई.. दहेज के दानवों की कहानी

दुल्हन हाथों में मेहंदी और आंखों में सपने सजाए बारात का इंतजार करती रही, लेकिन दूल्हे पक्ष ने ₹1 लाख नकद, अपाचे बाइक और सोने की चेन की मांग पूरी न होने पर बारात ही नहीं भेजी*..

 

बलवान सिंह ब्यूरो चीफ बाराबंकी* बाराबंकी के बदोसराय थाना क्षेत्र के कसरैलाडीह गांव से एक ऐसी ख़बर सामने आई है जिसने इंसानियत को फिर शर्मसार कर दिया है। एक घर में जहां शहनाइयों की गूंज होनी थी, वहां सन्नाटा पसरा रहा। दुल्हन हाथों में मेहंदी सजाए पूरी रात बारात का इंतज़ार करती रही… आंखें रास्ते पर टिकी थीं, लेकिन बारात नहीं आई। कारण? दहेज।

क्या है पूरा मामला?
दुल्हन के पिता ने जो आरोप लगाए हैं, वो सीधे हमारे समाज के उस स्याह चेहरे को उजागर करते हैं, जहां रिश्ता अब प्रेम, विश्वास या संस्कारों से नहीं, बल्कि पैसों और ज़ेवर से तौला जाता है।

पीड़ित परिजनों के अनुसार, लड़के वालों ने शादी से पहले ₹1 लाख नकद, अपाचे मोटरसाइकिल, और दूल्हे व उसके पिता के लिए सोने की चेन की मांग की थी। जब यह मांग पूरी नहीं हुई, तो दूल्हे पक्ष ने ऐन वक्त पर दूल्हे की तबीयत खराब होने का बहाना बना दिया और बारात लेकर नहीं पहुंचे।

दुल्हन की खामोशी, समाज के लिए सवाल
सोचिए, एक युवती जो सपनों के साथ सजती-संवरती है, वो कैसे खुद को संभालती होगी जब उसके सपनों का महल सिर्फ इसलिए ढह जाए क्योंकि उसके पिता दहेज नहीं जुटा सके? क्या ये वही समाज है जो “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” के नारे लगाता है?

पुलिस में शिकायत
दुल्हन के परिजनों ने इस पूरे मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई है। अब देखना ये है कि कानून इस मामले में क्या कदम उठाता है। क्या दहेज के लालची लोगों को सज़ा मिलेगी? या फिर एक और लड़की की उम्मीदें यूं ही टूटकर रह जाएंगी?

अब वक्त है कि हम सिर्फ अफसोस न करें, बल्कि आवाज़ उठाएं — ताकि किसी और बेटी की मेहंदी बिना बारात के न सूखे। कानून को भी चाहिए कि ऐसे मामलों में सख़्त से सख़्त कार्रवाई करे, ताकि ये ‘दहेज के दानव’ दोबारा किसी सपने को कुचल न सके

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