*वरिष्ठ कवि और दोहाकार डॉ सुरेन्द्र सिंह रावत द्वारा संकलित व सम्पादित सांझा काव्य संग्रह ‘काव्यान्जली 2024’ का लोकार्पण हुआ*

 

*राजू बोहरा / वरिष्ठ संवाददाता*
हाल ही में साहिबाबाद स्थित ट्रू मीडिया के कार्यालय में जानेमाने कवि और दोहाकार डॉ सुरेन्द्र सिंह रावत द्वारा संकलित व सम्पादित सांझा काव्य संग्रह ‘काव्यान्जली – 2024’ चुनिन्दा कवियों की चुनिन्दा कविताओं का लोकार्पण भव्य तरीके से सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता हिंदी अकादमी दिल्ली के पूर्व उप सचिव ऋषि कुमार शर्मा ने की। डॉ संजय जैन, मशहूर गज़लकार डॉ कविता मल्होत्रा प्रसिद्ध साहित्यकार व समाज सेविका कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

डॉ सुरेन्द्र सिंह रावत जिन्होंने पिछले वर्षों में कई बेहतरीन पुस्तकों से साहित्य की सेवा की है ने अपने सम्बोधन में बताया कि सांझा संग्रह में देश भर के 25 चुने हुए रचनाकारों की प्रतिनिधी रचनाओं को शामिल किया गया है। इस सांझा संग्रह में अनुभवी व उर्जावान रचनाकारों की रचनाएं एक ही जगह पर उपलब्ध हो जाने से इस सांझा संग्रह की महत्ता बढ़ गई है। जहां इसमें वरिष्ठतम और आज के नए नए रचनाकारों की प्रणेता आशा शैली की ताजी रचनाओं का आनन्द लिया जा सकता है वहीं संगीता वर्मा का कवित्व भी मौजूद है।

जहां एक ओर उत्तराखण्ड के जाने माने हस्ताक्षर मोहन जोशी की रचनाएं हैं वहीं पर भारत सरकार में वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ मनोज उपरेती की रचनाओं कि आक्रामकता भी है, मशहूर व्यंगकार डॉ ललित जी सम्पादक राष्ट्रीय पुस्तक न्यास की अनुपम शैली भी है तो वरिष्ठ रचनाकार तारा पाठक की मर्मपर्शी दिल को छू लेने वाली रचनाएं भी हैं। इसके अलावा बहुत से ऊर्जावान व नए रचनाकारों यथा शैलजा सक्सेना, महान कवि कुँवर बेचैन जी की भतीजी मनिषा गुप्ता, ज्योर्मयी पंत वरिष्ठ कवियित्री, नीरज बवारी प्रसिद्ध मंच संचालक व रचनाकार, शालिनी शर्मा, ज्योति जुल्का, हेेम पंत वरिष्ठ नाटककार व बहु चर्चित मंच निर्देशक अरुण कुमार अरुण, उत्तराखण्ड के सशक्त हस्ताक्षर, वरिष्ठ रचनाकार व समाज सेवी सूक्ष्मलता महाजन, राजू पाण्डेय, विनम्र, रोहित का काव्यंजली में शामिल होना इस को भव्यता प्रदान करता है।

अपने अध्यक्षीय उद्घोषण में ऋषि कुमार शर्मा ने संग्रह में चयनीत कविताओं, दोहों, ग़ज़लों आदि के लिए संपादक डॉ सुरेन्द्र सिंह रावत की प्रशंसा की। तत्पश्चात डॉ कविता मल्होत्रा तथा डॉ संजय जैन ने इस तरह के प्रयासों का समर्थन किया। पुस्तक की भूमिका देश के अग्रणीय व सुप्रसिद्ध दोहाकार डॉ मनोज कामदेव ने लिखी है। कार्यक्रम का शुभारम्भ मंचासीन अतिथियों ने दीप जलाकर तथा सरस्वती वंदना से किया। तत्पश्चात लेखक व दोहाकार डॉ सुरेन्द्र सिंह रावत ने सभी अतिथियों का पुष्प गुच्छ, माला और शॉल से स्वागत किया।

पुस्तक लोकार्पण समारोह के तुरंत बाद द्वितीय सत्र में आमंत्रित लगभग 30 से अधिक कवि एवं कवियित्रियों ने अपनी-अपनी रचनाओं से समॉ बांध दिया। उपस्थित कवियों में पृथ्वी सिंह केदारखण्डी, संगीता वर्मा, शैलजा सक्सेना, नीरज बवारी, ज्योति जुल्का, अरुण कुमार अरुण, सूक्शमलता महाजन, लक्ष्मी अग्रवाल, शालिनी शर्मा, अपर्णा थपलियाल, डॉ संतोष संप्रीति, डॉ राधा बिष्ट व अन्य कवियों सहित मंचासीन अतिथिगण ने बेहतरीन गीत, दोहे, ग़ज़ल, मुक्तक, छंद, छणिकाएँ, कविताओं आदि से पूरा माहौल साहित्यमय बना डाला। संचालन कवियित्री व मंच संचालक लक्ष्मी अग्रवाल ने किया। इस कार्यक्रम का आयोजन द इनक्रेडिबल पहाड़ी के तत्वाधान में किया गया।

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