बिहार में शिक्षकों की नियुक्ति में बाहरी अभ्यर्थियों की एंट्री सीमित

 

रमेश ठाकुर – पश्चिम चंपारण,बिहार_ बिहार के युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने राज्य के युवाओं को सरकारी नौकरी में प्राथमिकता देने के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। अब बिहार में शिक्षक बहाली प्रक्रिया में डोमिसाइल नीति लागू की जाएगी, जिससे राज्य के स्थायी निवासियों को शिक्षक नियुक्तियों में वरीयता मिलेगी।

*स्थानीय युवाओं को मिलेगा लाभ*

इस नीति के लागू होने के बाद अब शिक्षक बहाली में अन्य राज्यों के अभ्यर्थियों की तुलना में बिहार के स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। लंबे समय से चली आ रही इस मांग को आखिरकार नीतीश सरकार ने स्वीकार कर लिया है, जिससे राज्य के लाखों अभ्यर्थियों में उत्साह है।

*मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर दी जानकारी*

मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने इस फैसले की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) के माध्यम से साझा की। उन्होंने लिखा,
“नवम्बर 2005 में सरकार बनने के बाद से ही हमलोग शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए लगातार काम कर रहे हैं। शिक्षकों की बहाली में बिहार के निवासियों (डोमिसाइल) को प्राथमिकता देने हेतु शिक्षा विभाग को संबंधित नियमों में आवश्यक संशोधन करने का निर्देश दिया गया है।”

*TRE-4 से होगी शुरुआत, STET का आयोजन पहले*

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि यह डोमिसाइल नीति TRE-4 से ही प्रभावी होगी। वर्ष 2025 में TRE-4 और वर्ष 2026 में TRE-5 का आयोजन किया जाएगा। इसके पहले एसटीईटी (STET) का आयोजन कराए जाने का निर्देश भी दिया गया है, ताकि योग्य उम्मीदवारों की पहचान पहले ही सुनिश्चित की जा सके।

*बेरोजगार युवाओं के लिए नई उम्मीद*
राज्य में डोमिसाइल नीति लागू होने से बिहार के लाखों युवाओं को सरकारी शिक्षक बनने की दिशा में एक बड़ा अवसर मिलेगा। यह निर्णय न केवल उन्हें रोजगार देगा, बल्कि राज्य की शिक्षा व्यवस्था को भी स्थानीय सामाजिक-सांस्कृतिक समझ से जोड़ने में सहायक होगा।

*विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया का इंतज़ार*

इस बीच, इस बड़े फैसले पर विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया का इंतज़ार है। हालांकि, आम लोगों और छात्र संगठनों ने इस निर्णय का स्वागत किया है। सोशल मीडिया पर भी इस फैसले की जमकर सराहना हो रही है।

*चुनाव पूर्व बड़ा कदम*

विधानसभा चुनाव से पूर्व लिया गया यह फैसला राजनीति के लिहाज़ से भी बेहद अहम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का यह कदम बिहार के युवाओं में उनके प्रति विश्वास को और मजबूत कर सकता है।

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