लंबे विरोध के बावजूद भारत-बांग्लादेश सीमा पर दोस्ती की झप्पी
फूलबाड़ी, जलपाईगुड़ी (उत्तर बंगाल):
भारत और बांग्लादेश के संबंधों का इतिहास दोस्ती और तनाव—दोनों का ही गवाह रहा है। समय-समय पर कूटनीतिक खींचातानी भले ही दोनों देशों के रिश्तों में दरार बनाई , लेकिन सीमा पर एक अलग ही तस्वीर देखने को मिलती है।
हर शनिवार जलपाईगुड़ी जिले के फूलबाड़ी सीमा पर ‘ज़ीरो पॉइंट’ पर खड़े होकर दोनों देशों के सीमा रक्षक—भारत के बीएसएफ (BSF) और बांग्लादेश के बी जी बी (BGB)—दोस्ती और भाईचारे की एक अनूठी मिसाल पेश करते हैं। साथ में दोनों देशों के राष्ट्रीय ध्वज को सलामी देते हैं, और गले मिलकर एक दूसरे का सम्मान करते हैं। यह दृश्य न सिर्फ भावुक करता है, बल्कि सीमा के आस-पास रहने वाले आम लोगों को भी एकजुटता का संदेश देता है।
हालांकि जमीनी सच्चाई इतनी सरल नहीं है। पहले भारत से बांग्लादेश में दैनिक वस्तुओं का बड़ा निर्यात होता था। लेकिन कई कारणों से यह व्यापार अब लगभग ठप पड़ चुका है। ट्रकों की लंबी कतारें अब जंग लगे लोहे के ढेर में तब्दील हो चुकी हैं। बरसात के पानी में उनके पहिए जमे पड़े हैं।
इस ठहराव का असर बांग्लादेशी बाजारों पर साफ दिख रहा है—वहाँ मूल्यवृद्धि के कारण आम लोगों की जिंदगी मुश्किल हो गई है।
मजदूर वर्ग को अपने परिवार चलाने के लिए खून-पसीना एक करना पड़ रहा है।
सिर्फ आर्थिक ही नहीं, राजनीतिक संबंधों में भी ठंडापन साफ झलकता है। पहले भारत-बांग्लादेश के मधुर संबंधों से बांग्लादेश को काफी लाभ मिला था। लेकिन हाल की घटनाओं ने इस दोस्ती को धीरे-धीरे ठंडा कर दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में यह दोस्ती किस दिशा में जाएगी, यह कहना अभी मुश्किल है।
लेकिन इन सबके बावजूद, हर शनिवार फूलबाड़ी सीमा पर दिखाई देने वाला दृश्य उम्मीद की एक किरण है।
जहाँ सीमा रक्षक कंधे से कंधा मिलाकर परेड करते हैं, झंडों को सम्मान देते हैं और एक-दूसरे को गले लगाते हैं, वहीं से यह मूक संदेश जाता है—
राजनीतिक तनाव चाहे जो भी हो, भारत और बांग्लादेश के आम लोग और उनके सीमा रक्षक आज भी दोस्ती और भाईचारे की डोर से बंधे हैं।




