बंगाल विधानसभा में विशेष सत्र के पहले भाजपा का जमकर विरोध
जान गई है जनता नौकरी चोर है ममता नारा के साथ भाजपा का विरोध
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योग्य शिक्षकों को बिना दोबारा बहाली को लेकर लाए बिल भाजपा करेगी समर्थन
अजित प्रसाद/ सिलीगुड़ी: शिक्षकों की नौकरी के नाम पर हुए राज्य सरकार के खेल के खिलाफ चार दिवसीय विशेष सत्र के पहले दिन ही भाजपा ने जमकर विरोध किया है। विरोधी दल नेता शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में सभी भाजपा विधायकों ने हाथ में पोस्टर लेकर जान गई है जनता नौकरी चोर है ममता नारा के साथ भाजपा का विरोध शुरू हुआ। यह प्रदर्शन विधानसभा के गेट पर हो रहा था। इसी बीच शिक्षकों के चार प्रतिनिधि शुभेंदु अधिकारी से मिलकर अपनी बात रखी। अधिकारी ने कहा कि आज प्रदेश ही नहीं पूरा देश जान गया है कि कैसे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के देखरेख में शिक्षक बहाली के नाम पर रुपए का लेनदेन हुआ। नौकरी को बेचा गया। ऐसे में विशेष सत्र में अगर सरकार योग्य शिक्षकों की बहाली के लिए कोई प्रस्ताव लाती है तो भाजपा उसका समर्थन करेगी। नहीं तो किसी प्रकार के प्रस्ताव का भाजपा विरोध करती है। उन्होंने कहा कि जब दागी शिक्षकों की सूची जारी की गई है तो योग्य शिक्षकों को क्यों दोबारा परीक्षा देना होगा। उन्होंने कहा कि अब बंगाल की जनता जान गई है कि बंगाल में कैसे टीएमसी लुट मचाया हुआ है। विधानसभा के बाहर गतिरोध बना हुआ है। सुरक्षा के व्यापक इंतजाम है। बंगाल में शिक्षक भर्ती भ्रष्टाचार मामले को लेकर जारी विवाद और गहरा गया है। स्कूल सर्विस कमीशन ने सुप्रीम कोर्ट के दबाव में शनिवार को अयोग्य शिक्षकों-शिक्षिकाओं की नई सूची सार्वजनिक की। इनमें एक नाम है उत्तर दिनाजपुर के चोपड़ा से तृणमूल कांग्रेस विधायक हमीदुल रहमान की बेटी रोशना बेगम का। रोशना का नाम 2022 में भी अयोग्य अभ्यर्थियों की सूची में सामने आया था। वेबसाइट पर रोल नंबर और विवरण के साथ प्रकाशित सूची में उन्हें फिर से “अयोग्य” शिक्षकों की श्रेणी में चिह्नित किया गया है। रोशना कालीगंज हाईस्कूल में पढ़ा रही थीं। इस सूची में सिर्फ विधायक की बेटी ही नहीं, बल्कि कई प्रभावशाली नेताओं से जुड़े नाम भी हैं। इनमें सबसे प्रमुख है पूर्व मंत्री परेश अधिकारी की बेटी अंकिता अधिकारी। अंकिता की नियुक्ति पहले ही 2022 में तत्कालीन कलकत्ता हाईकोर्ट के जज अभिजीत गांगुली ने रद्द कर दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने भी बाद में उनके पक्ष में राहत देने से इनकार कर दिया था और उनकी नियुक्ति को “संदेहास्पद” करार दिया था। नाम और रोल नंबर सहित जारी इस सूची में 474वें क्रम पर तृणमूल कांग्रेस की सोनारपुर नगरपालिका के 18 नंबर वार्ड की पार्षद कुहेली घोष का नाम भी सूची में आया है। कुहेली घोष इस समय सोनारपुर चौहाटी हाई स्कूल में इतिहास की शिक्षिका हैं । वह लगातार तीन बार तृणमूल पार्षद चुनी जा चुकी हैं। सूची में नाम आने के बाद उन्होंने नाराजगी जताते हुए साफ कहा है कि वो इस मामले में कानूनी लड़ाई लड़ेंगी उनके अनुसार, “यह कोई नया विषय नहीं है। 2022 में भी मेरा नाम आया था। तब भी मीडिया में चर्चा हुई थी। मैं जानती हूं कि मैंने अपनी योग्यता के आधार पर नौकरी पाई है। मैंने सीबीआई को चुनौती दी थी, लेकिन उन्होंने न तो मुझे बुलाया और न ही कोई सूची प्रकाशित की। इस बार मेरा नाम क्यों आया है, यह मेरे लिए भी स्पष्ट नहीं है। कुहेली घोष पहले प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका थीं। बाद में उन्होंने वह नौकरी छोड़कर वर्तमान पद पर कार्यभार ग्रहण किया। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार उनकी प्राथमिक की नौकरी बहाल होनी चाहिए। इस बीच उन्हें शुक्रवार की रात एक नई परीक्षा का एडमिट कार्ड मिला, जबकि दूसरी आवेदन प्रक्रिया रद्द कर दी गई। इस विरोधाभास पर उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि इसका जवाब वही दे सकते हैं जिन्होंने सूची तैयार की है। उन्होंने बताया कि वह अपने वकील से परामर्श कर रही हैं और सोमवार को नया मुकदमा दायर करेंगी। गौरतलब है कि कुहेली घोष अकेली नहीं हैं जिनका नाम इस सूची में आया है। तृणमूल कांग्रेस से जुड़े कई प्रभावशाली नेताओं और उनके रिश्तेदारों के नाम भी इसमें शामिल हैं। सूची में एक तृणमूल विधायक की बेटी और पूर्व मंत्री की बेटी का नाम भी मौजूद है।



