शांति और मैत्री:भारत – अफगानिस्तान संबंध बेहद पुराने रिश्तों में गर्मजोशी का संचार !

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आपने रवीन्द्रनाथ टैगोर की काबुलीवाला शीर्षक कहानी पढ़ी होगी। अफगानिस्तान के सौदागर पुराने जमाने से हमारे देश में आकर सूखे मेवों ऊन के चादर शाल यह सब बेचा करते थे। आतंकवाद से अफगानिस्तान के साथ भारत के रिश्तों में नरमी आती गयी। अब भारत अफगानिस्तान छात्र छात्राओं को अपनी यूनिवर्सिटियों में पढ़ाई-लिखाई का मौका प्रदान करेगा।
यह जरूरी है। भारत के उद्योगपतियों को अफगानिस्तान में निवेश करना चाहिए। दोनों देशों के बीच संबंध बहाली की इस प्रक्रिया में हमारे देश के
विदेश मंत्री जयशंकर ने मित्र देश के रूप में अफगानिस्तान को बीस एंबुलेंस की चाबी भी उपहार स्वरूप भेंट दिया है। मैं जब जामिया मिल्लिया इस्लामिया में पढ़ता था तब अफगानिस्तान में नजीबुल्लाह की सरकार अफगानिस्तान में थी और वहां के काफी छात्र छात्राओं को मैं जामिया मिल्लिया इस्लामिया में देखा करता था। वे अपने देश से हमारी यूनिवर्सिटी में पढ़ाई – लिखाई के लिए आये थे। आतंकवाद ने अफगानिस्तान के साथ हमारे रिश्तों को बदल दिया और यह खुशी की बात है कि हमारे देश की सरकार अफगानिस्तान के साथ संबंधों को बहाल करने में फिर जुट गयी है। युद्ध की विभीषिका से त्रस्त अफगानिस्तान को भारत ने मदद का भरोसा दिया है और अफगानिस्तान ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सहयोग करने की बात कही है। दक्षिण पूर्व एशिया में अफगानिस्तान के साथ संबंधों की बहाली इस क्षेत्र में शांति और विकास के नये युग को शुरू करेगी। ज्ञातव्य है कि पाकिस्तान के साथ आपरेशन सिंदूर युद्ध में अफगानिस्तान ने कश्मीर को भारत का
प्रांत बताया था। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के भी काफी इलाकों पर कब्जा कर रखा है। भारत पोस्ट



