गंगा की बहती धार!
कविता
राजीव कुमार झा
मोकामा बड़हिया
टाल के जमींदार !
चल पड़े साथ – साथ
हाथों में डाले अपना हाथ
सूरज उगा
मतदान केंद्र के द्वार ।
चतुर्दिक महंगाई
अव्यवस्था की
खत्म हो रही मार!
विजय कुमार सिन्हा जी
यहां आकर घूम रहे
पहनकर
भाजपा का विजय हार ।
ललन बाबू के संग
उनकी दुधारी तलवार ।
दियारे में शुरू हुई जंग
फुलेना जी आये
अपनी पुरानी कार पर
सवार
गंगा की बहती हंसती
धार।
खुटहा ओलीपुर के पार
वीरूपुर हलसी में गूंज रही
भाजपा की जयकार!

