बरौनी रिफाइनरी की धुंआ से लोग हो रहे कैंसर से संक्रमित: अमीन हामजा
स्थानीय योग्य बेरोजगार युवाओं के सपनों पर कुठाराघात है बरौनी रिफाइनरी की नयी भर्ती
नन्दकिशोर दास
बेगूसराय ब्यूरो। बरौनी रिफाइनरी द्वारा हाल ही में प्रकाशित जूनियर अधिकारी भर्ती विज्ञप्ति ने स्थानीय योग्य बेरोजगार युवाओं की उम्मीदों पर गहरा कुठाराघात किया है। इस भर्ती में केवल डिप्लोमा धारकों को ही अवसर दिया गया है। जिस कारण बीएससी और एमएससी उत्तीर्ण छात्र अपने आप को ठगा और असहाय महसूस कर रहे हैं। हजारों छात्र बरौनी रिफाइनरी में सेवा देने की उम्मीद से विज्ञान विषय का चयन करते हैं।लेकिन इस निर्णय से उनके अरमानों को चकनाचूर कर दिया गया है। उपर्युक्त बातें ऑल इंडिया यूथ फेडरेशन द्वारा आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए एआईएसएफ के राष्ट्रीय सचिव अमीन हमजा, एआईवाईएफ के राज्य अध्यक्ष शंभू देवा और एआईवाईएफ बेगूसराय के जिला मंत्री धीरेंद्र कुमार ने संयुक्त रूप से कही। उन्होंने कहा कि यह भर्ती केंद्रीय स्तर पर की जा रही है, जिस कारण राज्य सरकार का आरक्षण लागू नहीं होगा। इससे स्थानीय प्रतिभाओं को आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा। विडंबना यह है कि रिफाइनरी के विस्तार के दौर में भी स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता नहीं दी गई है। बरौनी रिफाइनरी से निकलने वाले प्रदूषण का दुष्प्रभाव आसपास के गाँव-गोविन्दपुर, कैलाशपुर, सबौरा, केशावे समेत अनेक इलाकों पर पड़ रहा है। चिमनियों से निकलने वाले धुएँ से स्थानीय लोग कैंसर, अस्थमा जैसी बीमारियों से पीड़ित हो रहे हैं। खेतों में अरहर, पपीता, अमरूद, आलू समेत दलहन व तेलहन फसलों का उत्पादन प्रभावित हो रहा है। इसके बावजूद जब नौकरियों की बात आती है तो स्थानीय युवाओं को दरकिनार किया जाता है और बाहरी लोगों को अवसर दिया जाता है। यह भेदभाव अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आज बरौनी रिफाइनरी राजनीति का अड्डा बन चुकी है। एक केंद्रीय मंत्री अपने कार्यकर्ताओं के साथ गेस्ट हाउस पर कब्जा जमाए हुए हैं और पार्टी की बैठकें रिफाइनरी के खर्च पर करवाई जा रही हैं। इतना ही नहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह रिफाइनरी के करोड़ों रुपये खर्च करने वाले हैं। इस अवसर पर एआईएसएफ के राष्ट्रीय सचिव अमीन हमजा, एआईवाईएफ के राज्य अध्यक्ष शंभू देवा, एआईवाईएफ बेगूसराय के जिला सचिव धीरेंद्र कुमार तथा एआईवाईएफ बेगूसराय के जिला सचिव धिरेन्द्र कुमार ने संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा कि मोदी जी लगातार बिहार की संपति को कॉर्पोरेट घराने को बेच रहे हैं। इसका जीता जागता उदाहरण मोदी जी ने पावर प्लांट के नाम पर भागलपुर में 1050 एकड़ जमीन सालाना 1 रूपये की दर से गौतम अडानी को बेच दिया। जो शर्मनाक है। मोदी जी को बिहार चुनाव के हारने का डर इतना सता रही है कि लोगों को लुभाने के लिये जस्ट चुनाव के वक्त ही सरकार ने जीएसटी के दरों में कटौती करने का फैसला किया। जबकि जीएसटी लागू होने से अभी तक सरकार गरीब व्यापारों से लूटते रही। सरकार द्वारा जीएसटी के नाम पर अभी तक लूटे गये पैसे को वापस करना चाहिये।



