अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना ने की घुसपैठ
-जनजाति समुदाय के दावों से उठ रहे कई सवाल
विशेष प्रतिनिधि
नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले में कथित चीनी घुसपैठ को लेकर नाह जनजातीय समुदाय ने गंभीर चिंता जताई है। समुदाय का आरोप है कि पिछले छह वर्षों में चीनी सेना यानि पीएल, ने उनके पारंपरिक चरागाहों, शिकार क्षेत्रों और कृषि भूमि के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया है। इस मुद्दे को लेकर नाह वेलफेयर सोसाइटी ने हाल ही में अपर सुबनसिरी के उपायुक्त को एक ज्ञापन सौंपते हुए तत्काल हस्तक्षेप और स्थिति की जांच की मांग की है।
विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, नाह वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष केरु चाडेर ने ज्ञापन में कहा है कि जिन पैतृक इलाकों में कभी समुदाय के लोग स्वतंत्र रूप से घूमते थे, वन उत्पाद एकत्र करते थे और अपने पशुओं को चराते थे, वह अब चीनी सेना के कब्जे में चले गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सीमा से सटे कई इलाकों में चीन लगातार अपनी गतिविधियां बढ़ा रहा है और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थानों पर नियंत्रण स्थापित कर रहा है। समुदाय ने आरोप लगाया है कि ताकसिंग राजस्व क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पांच प्रमुख स्थानों पर चीनी गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं। इनमें असाफिला क्षेत्र का ओयिंग, चुजार्ता क्षेत्र का पनियार, मरनाफे का मरपान, पोत्रांग झील क्षेत्र और टिंडिंगतांग शामिल हैं। नाह वेलफेयर सोसाइटी का कहना है कि ये सभी इलाके वर्ष 2020 तक उनके पारंपरिक नियंत्रण में थे, लेकिन अब धीरे धीरे चीनी घुसपैठ की चपेट में आ गए हैं। संगठन ने यह भी दावा किया कि इन स्थानों में कुछ धार्मिक और तीर्थ महत्व के स्थल भी शामिल हैं, जिससे स्थानीय लोगों की भावनात्मक चिंता और बढ़ गई है।
ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया कि चीनी सेना ने भारतीय सीमा के भीतर सड़कों और सैन्य शिविरों का निर्माण किया है। समुदाय का कहना है कि पिछले दस से पंद्रह वर्षों के दौरान ताकसिंग सीमा क्षेत्र में चीन की गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और इसका उद्देश्य अधिक से अधिक भूमि पर नियंत्रण स्थापित करना है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह स्थिति अब बेहद चिंताजनक हो चुकी है और हर दिन भारतीय भूभाग का हिस्सा धीरे धीरे हाथ से निकलता जा रहा है। इस बीच, नाचो विधानसभा क्षेत्र के विधायक नकाप नालो ने भी मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है और आरोपों की आधिकारिक पुष्टि प्रशासन द्वारा की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि स्थानीय समुदाय के आरोप सही साबित होते हैं तो यह अत्यंत चिंताजनक स्थिति होगी। विधायक ने प्रशासन और संबंधित एजेंसियों से मामले की गहन जांच की आवश्यकता पर जोर दिया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है। समुदाय ने केंद्र और राज्य सरकार से सीमा क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने, स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और कथित कब्जों की जांच कर उचित कार्रवाई करने की मांग की है। अब सभी की नजर सरकार और प्रशासन की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है।



