दिलीप घोष का भारतीय मतदाता पहचान व बंगाली पहचान पर निशाना
सिलीगुड़ी : भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, दिलीप घोष ने कहा कि “वास्तविक मतदाता कार्ड (genuine voter card) आम लोगों को उपलब्ध नहीं हो पाता, जबकि कहीं से आने वाले लोग आसानी से वोटर‑आधार प्राप्त कर रहे हैं,” और यह त्रिपक्षीय गठबंधन, यानी तृणमूल कांग्रेस, की नियोजित ‘नेटवर्किंग’ का काम है।
दिलीप घोष ने आगे कहा कि “देश में जितने भी सांसद-विधायक हैं, उनमें अगर कोई ‘अबांगाली’ (बंगाली नहीं) भी है, तो वह यहाँ का जन्मे-बढ़े नागरिक ही है। लेकिन टीएमसी द्वारा चुने गए उन ‘बाहरी’ सांसदों का क्या? क्या उन्हें बंगाली संस्कृति पता है? दुर्गा पूजा का महत्व जानते हैं? उन्हें जबरदस्ती बंगाली बताया जा रहा है।”
उन्होंने यह दावा करते हुए कहा कि “अगर कोई हिंदुस्तानी (बंगाली) बंगाली कहकर सिर्फ वोट पाने की कोशिश करता है, तो वह बंगाली की असली भावनाओं से खेल रहा है।”




