उत्तर प्रदेश में बढ़ते गन कल्चर
बाहुबलियों को हथियारों के लाइसेंस की होगी जांच
-19 चर्चित नामों का पूरा ब्यौरा किया तलब
-10 लाख 8953 हथियार लाइसेंस धारक हैं मौजूद
हरप्रीत भट्टी
लखनऊ। उततर प्रदेश में बाहुबलियों को जारी किए गए हथियार लाइसेंसों को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और सभी पुलिस अधिकारियों से पूछा है कि आखिर गंभीर आपराधिक मामलों में नाम आने वाले बाहुबलियों और दबंग नेताओं को हथियारों का लाइसेंस किस बिनाह पर दिया गया है। हाईकोर्ट ने इस मामले में बृजभूषण शरण सिंह, राजा भैया, धनंजय सिंह, बृजेश सिंह, विनीत सिंह समेत 19 चर्चित नामों का पूरा ब्यौरा तलब कर लिया है। कोर्ट ने यह भी पूछा है कि इन लोगों को किस परिस्थिति में हथियार के लाइसेंस जारी किए गए। उनके खिलाफ कितने मुकदमे दर्ज हैं और उन्हें किस तरह की सरकार सुरक्षा मिली हुई है।
दरअसल, संत कबीर नगर निवासी जय शंकर की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी। याचिका में आरोप लगया गया कि प्रदेश में हथियार लाइसेंस जारी करने और उनके नवीनीकरण में नियमों अनदेखी की जा रही है। याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि कई ऐसे लोग हथियार के लाइसेंस लेकर खुलेआम प्रदर्शन करते हैं जिनकी आपराधिक पृष्ठभूमि रही है। इससे समाज में डर और गन कल्चर बढ़ रहा है। मामले की सुनवाई जस्टिस विनोद दिवाकर की कोर्ट में हुई। सुनवाई के दौरान जब उत्तर प्रदेश सरकार ने अपना हलफनामा दाखिल किया तो आंकड़े को देख कर कोर्ट भी हैरान हो गया।
राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि उत्तर प्रदेश में इस समय 10 लाख 8953 हथियार लाइसेंस धारक हैं। इनमें 6062 ऐसे लोग हैं जिनके खिलाफ दो या उससे अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। सरकार ने यह भी बताया कि 23,407 लाइसेंस अभी लंबित हैं जबकि 20,960 परिवार ऐसे हैं जिनके पास एक से ज्यादा हथियारों के लाइसेंस मौजूद हैं। इन आंकड़ों ने कोर्ट की चिंता और बढ़ा दी। कोर्ट ने सवाल उठाया कि आखिर जिन लोगों पर गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं, उन्हें हथियार रखने की अनुमति कैसे दी गई।
कोर्ट ने जिन चर्चित नामों का रिकार्ड मांगा है, उनमें कई बड़े राजनीतिक और आपराधिक चेहरे शामिल हैं। कोर्ट ने जिन लोगों का ब्यौरा मांगा है उनमें बृजभूषण शरण सिंह, राजा भैया, धनंजय सिंह, बृजेश सिंह विनीत सिंह, अब्बास अंसारी, खान मुबारक, अजय प्रताप सिंह उर्फ अजय सिपाही, संजय सिंह सिंगला, अतुल वर्मा,मोहम्मद साहब, सुधाकर सिंह, गूड्डू सिंह, अनूप सिंह, लल्लू यादव, बच्चू यादव और जुगनू वालिया जैसे नाम शामिल हैं। कोर्ट ने सरकार से कहा है कि इन सभी के सही पते, उनक खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमे, हथियार लाइसेंस का विवरण और सुरक्षा से जुड़ी जानकारी पेश की जाए।
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान हथियारों के प्रदर्शन पर सख्त नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि कई जगहों पर लाइसेंसी हथियारों का खुलेआम प्रदर्शन किया जाता है, जिससे समाज में गलत संदेश जाता है। खासकर सोशल मीडिया पर हथियारों के साथ फोटो और वीडियो डालने का प्रचलन बढ़ा है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन से पूछा है कि ऐसे मामलों में अब तक क्या कार्रवाई की गई और लाइसेंस का दुरुपयोग को रोकने के लिए क्या व्यवस्था है। इससे दिलचस्प बात यह है कि सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे में कुछ चर्चित बाहुबलियों के नाम नहीं थे। इसी पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जाहिर की और कहा कि जिन लोगों की छवि बाहुबली या अपराध से जुड़ी रही है, उनका रिकार्ड भी कोर्ट के सामने रखा जाए। इसके बाद कोर्ट ने अलग से 19 लोगों की सूची तैयार कर उनका पूरा आपराधिक इतिहास और लाइसेंस संबंधी जानकारी तलब कर ली।
हाईकोर्ट ने सिर्फ हथियार लाइसेंस ही नहीं, बल्कि इन बाहुबलियों को मिली सरकारी सुरक्षा पर भी सवाल उठाए हैं। कोर्ट जानना चाहता है कि जिन लोगों के खिलाफ गंभीर मुकदमे हैं, उन्हें सरकारी सुरक्षा और हथियार दोनों साथ होने से कानून व्यवस्था पर असर पड़ता है। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरु हो गई है कि क्या आपराधिक पृष्ठभमि वाले लोगों के हथियार लाइसेंस रद्द किए जा सकते हैं। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जांच में नियमों के उल्लंघन या गलत जानकारी देकर लाइसेंस लेने की बात सामने आती है तो प्रशासन कार्रवाई कर सकता है। हालांकि अंतिम फैसला कोर्ट और प्रशासनिक जांच पर निर्भर करेगा।


