होर्मुज से अमेरिकी नाकाबंदी हटते ही नया फरमान
पहले फॉर्म, फिर प्रवेश : ईरान
विशेष प्रतिनिधि
तेहरान। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान ने बड़ा बदलाव कर दिया है। अमेरिका और ईरान के बीच हुए 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन ;एमओयू. के बाद अब कोई भी जहाज सीधे होर्मुज से नहीं गुजर सकेगा। ईरान ने नई अनुमति व्यवस्था लागू करते हुए कहा है कि केवल वही जहाज इस समुद्री मार्ग का इस्तेमाल कर पाएंगे जो पहले से आवेदन करेंगे और तय नियमों का पालन करेंगे। यह फैसला ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने की कोशिशों के बाद समुद्री व्यापार को फिर से सामान्य बनाने की तैयारी चल रही है। चूंकि दुनिया के करीब पांचवें हिस्से का तेल और एलएनजी इसी मार्ग से गुजरता है, इसलिए ईरान के इस कदम को वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
पहले होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए किसी विशेष अनुमति की जरूरत नहीं होती थी। जहाज अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों के तहत इस रास्ते का इस्तेमाल करते थे। लेकिन अब ईरान ने पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी ;पीजीएसए. नाम की नई संस्था बनाकर पूरी प्रक्रिया बदल दी है। अब हर जहाज को ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन करने के बाद ही उसे आगे बढ़ने की अनुमति मिलेगी। यानी अब होर्मुज से गुजरने का रास्ता स्वतः खुला नहीं रहेगा, बल्कि अनुमति आधारित होगा। ईरान का कहना है कि इससे समुद्री सुरक्षा, यातायात नियंत्रण और क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत किया जा सकेगा।
ईरान के नए नियमों के अनुसार केवल वही जहाज होर्मुज से गुजर सकेंगे जो पीजीएसए के पास निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन करेंगे। जहाज को अपना नाम, झंडा, आईएमओ नंबर, कार्गो की जानकारी, मालिक का विवरण, बीमा संबंधी दस्तावेज और यात्रा का पूरा कार्यक्रम देना होगा। इसके अलावा जहाज पर मौजूद चालक दल की संख्या और उनकी राष्ट्रीयता तक की जानकारी मांगी जाएगी। यदि कोई जानकारी अधूरी पाई जाती है तो आवेदन लंबित रखा जा सकता है या खारिज भी किया जा सकता है। इसका मतलब है कि अब केवल नियमों का पालन करने वाले जहाजों को ही प्रवेश मिलेगा।
पीजीएस, ने स्पष्ट किया है कि जहाजों को होर्मुज क्षेत्र में पहुंचने से कम से कम 48 घंटे पहले आवेदन जमा करना होगा। एजेंसी का कहना है कि क्षेत्र में अभी भी सुरक्षा चुनौतियां मौजूद हैं। कुछ समुद्री इलाकों में युद्ध के प्रभाव और संभावित खतरे बने हुए हैं। ऐसे में प्रत्येक जहाज के लिए अलग मार्ग और समय तय करना जरूरी है। ईरान का दावा है कि इससे टकराव, दुर्घटना और सुरक्षा संबंधी जोखिम कम होंगे। आवेदन की समीक्षा के लिए भी एजेंसी को 48 घंटे तक का समय मिलेगा।
अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के तहत शुरुआती 60 दिनों तक जहाजों से किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा। सुरक्षा, नौवहन सहायता, पर्यावरण संरक्षण और बीमा जैसी सेवाओं का खर्च ईरानी सरकार वहन करेगी। हालांकि यह छूट स्थायी नहीं है। ईरान पहले ही संकेत दे चुका है कि भविष्य में इन सेवाओं के लिए शुल्क लगाया जा सकता है। यानी अभी जहाज मुफ्त गुजर सकेंगे, लेकिन आने वाले समय में उन्हें सुरक्षा और अन्य सेवाओं के बदले भुगतान करना पड़ सकता है।




