सिमरिया में एशिया का सुप्रसिद्ध कल्पवास मेला 7 अक्टूबर से शुरू

वर्ष 2011 में तुलार्क अर्धकुंभ, फिर 2017 में महाकुंभ व 2023 में अर्धकुंभ अब 2029 में लगेगा महाकुंभ

 

सिमरिया धाम एक ऐसी पवित्र भूमि, जहां आस्था, संस्कृति और समृद्धि का है अनूठा संगम

त्रेता युग में मिथिला की धरती सिमरिया के गंगा तट पर स्वयं राजा जनक जी रहकर एक माह के कार्तिक में किया था कल्पवास

नन्दकिशोर दास

बेगूसराय ब्यूरो। सिमरिया में एशिया का सुप्रसिद्ध कल्पवास मेला 7 अक्टूबर से शुरू हो रहा है। इसे राजकीय मेला का दर्जा 2016 में मिला था। मेला का इतिहास है कि मिथिला में राजा जनक जी की यह तपोभूमि मानी जाती है। किंवदंती के अनुसार, त्रेता युग में मिथिला की धरती सिमरिया धाम के पवित्र गंगा तट पर स्वयं राजा जनक जी पहुंचकर कार्तिक मास में एक माह रहकर कल्पवास किए थे। तभी से यहां कल्पवास के लिए प्रसिद्ध हुआ।
यहां पर वर्ष 2011 में तुलार्क अर्ध कुंभ पहले लगा। उसके बाद 2017 में महाकुंभ, फिर 2023 में अर्धकुंभ लगा। अब 2029 में यहां पर महाकुंभ लगेगा। जैसा कि सिमरिया धाम सिद्धाश्रम के बाबा चिदात्मन जी महाराज ने बताया। इसलिए सिमरिया धाम की धरती अब और प्रसिद्ध हो गई है। कल्पवास करने के लिए बिहार के अलावे नेपाल, भूटान, यूं कहा जाए तो यहां पर पूरे भारत के लोग आते हैं।इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सिमरिया धाम पहुंचकर सिक्स लेन सड़क पुल का उद्घाटन कर देश को समर्पित किया। इसके पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी सिमरिया धाम कई बार आ चुके हैं। यह सिमरिया सौभाग्य है। इस बार सिमरिया धाम में कल्पवास मेला 07 अक्टूबर से लेकर 17 नवंबर तक चलेगा। इस मेला का मंत्रोच्चारण के साथ ध्वजारोहण आश्विन मास के पूर्णिमा के दिन 07 अक्टूबर को अखिल भारतीय सर्वमंगला सिद्धाश्रम के संस्थापक स्वामी चिदात्मन जी महाराज द्वारा किया जाएगा। इसी दिन आदिकवि वाल्मीकि जी की जयंती भी मनाई जाएगी। इस बार बाबा चिदात्मन जी महाराज के द्वारा कल्पवास मेला की प्रथम परिक्रमा कार्तिक मास के 17 अक्टूबर संक्रांति तिथि के दिन को होगी तथा दूसरी परिक्रमा छठ पूजा के नहाए खाए के दिन 25 अक्टूबर और मेला की अंतिम और तीसरी परिक्रमा 3 नवंबर को किया जाएगा। 8 अक्टूबर से सर्वमंगला सिद्धाश्रम के ज्ञान मंच से श्रीमद्भागवत कथा व कार्तिक माहात्म्य का भी शुभारंभ होगा। कुंभ सेवा समिति के बैनर तले वाराणसी के आचार्यों द्वारा मां गंगा की महाआरती 8 अक्टूबर से प्रारंभ कर 5 नवंबर कार्तिक पूर्णिमा के दिन समाप्त होगी। इसकी जानकारी कुंभ सेवा समिति के अध्यक्ष व जिले के प्रसिद्ध हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ नलिनी रंजन सिंह ने दी है। उन्होंने बताया कि इस बार भी मां गंगा की महाआरती गंगा तट के किनारे बने रिवर फ्रंट पर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि गंगा मां की आरती के दौरान जिला प्रशासन की ओर से भी दो दिनों तक सिमरिया महोत्सव भी मनाया जाएगा। मालूम हो कि यहां गंगा की महाआरती का शुभारंभ कुंभ सेवा समिति के बैनर तले वर्ष 2011 से लगातार हो रहा है। राजकीय कल्पवास मेला क्षेत्र को कुल 8 सेक्टर तथा 100 ब्लॉक में बांटा जाएगा। खालसा जन सेवा समिति के अध्यक्ष तुलसी विष्णु देवाचार्य जी की यह देखरेख में बनेगा। सिमरिया धाम में 100 से अधिक खालसा के साधु संतों का कल्पवास करने के लिए यहां पर आएंगे। सिमरिया कल्पवास मेला नजदीक होने के कारण कल से परसों तक साधु संत टेन्ट, पंडाल के साथ उनका आना शुरू हो जाएगा। इसको देखते हुए खालसा के अध्यक्ष तन तुलसी विष्णु देवाचार्य ने बेगूसराय जिला प्रशासन से यह मांग की है कि अविलंब साधु-संतों को मिलने वाली जमीन, बिजली, सफाई, प्रकाश की व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल, शौचालय समेत सभी बुनियादी सुविधाएं को शीघ्र उपलब्ध करवाई जाए।

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