बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा का पर्व इस साल 23 जनवरी
यह पर्व विद्या और ज्ञान की देवी सरस्वती को समर्पित है
* बसंत ऋतु के मौसम को ऋतुओं का राजा कहा जाता है
*
अजित प्रसाद : माघ माह शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी मनाई जाती है। इस बार 23 जनवरी शुक्रवार को चतुर्थग्रही योग के बीच बसंत पंचमी मनाई जायेगी। इस दिन चार ग्रहों का अद्भुत संयोग है। बसंत पंचमी को ज्ञान और विवेक का पर्व माना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन मां विद्यार्थियों को विशेष लाभ प्राप्त होता है, पीला रंग बसंत पंचमी का प्रतीक माना जाता है, जो ऊर्जा, सकारात्मकता और समृद्धि का संकेत है। पर्व विद्या और ज्ञान की देवी सरस्वती को समर्पित किया गया है. इस पर्व को ‘श्री पंचमी’ या ‘ज्ञान पंचमी’ के नाम से भी जाना जाता है. ये पर्व बंसत ऋतु के आने का प्रतीक माना जाता है।इस दिन विधि-विधान से माता सरस्वती का पूजन किया जाता है। छात्रों के लिए ये पर्व बहुत विशेष और महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन माता सरस्वती का पूजन करने से विद्या और ज्ञान का आशीर्वाद मिलता है. इस दिन चारों ओर एक ही रंग छाया रहता है और वो होता है पीला रंग। पीला रंग सकारत्मकता और शुभता का कारक माना जाता है. ये उत्सव की आत्मा माना जाता है. इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनें जाते हैं। आइए जानते हैं कि इसके पीछे रहस्य क्या है?
बसंत पंचमी कब है? हिंदू पंचांग के अनुसार, साल 2026 में माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि की शुरुआत 22 जनवरी 2026 को शाम 06 बजकर 15 मिनट पर हो रही है. वहीं इस तिथि का समापन 23 जनवरी 2026 को रात 08 बजकर 30 मिनट पर हो जाएगा. चूंकि 23 जनवरी को सूर्योदय पर पंचमी तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा का पर्व इस साल 23 जनवरी, शुक्रवार को मनाया जाएगा। बसंत पंचमी क्यों मनाई जाती है?
माँ सरस्वती का प्राकट्य उत्सव: पौराणिक कथाओं के अनुसार, ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की लेकिन उन्हें सब कुछ मौन और नीरस लगा। तब उन्होंने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे वीणा धारण किए हुए देवी सरस्वती प्रकट हुईं। उनके वीणा वादन से संसार को वाणी और सुर मिले। इसीलिए इस दिन को वाणी, बुद्धि, विद्या और कला की देवी के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। वसंत ऋतु का स्वागत: बसंत पंचमी से वसंत ऋतु की औपचारिक शुरुआत मानी जाती है। इस समय प्रकृति में हरियाली, फूलों की बहार, सरसों के पीले खेत और सुहावना मौसम देखने को मिलता है। यह ऋतु नवजीवन और उल्लास का प्रतीक है।
शिक्षा और नए कार्यों के लिए शुभ दिन
बसंत पंचमी को बच्चों का विद्यारंभ संस्कार,नई शिक्षा की शुरुआत,लेखन, संगीत, कला अभ्यास
व्यापार या किसी नए कार्य का आरंभ,करना अत्यंत शुभ माना जाता है। शुभ मुहूर्त (सरस्वती पूजा का उत्तम समय)
बसंत पंचमी के दिन प्रातःकाल से दोपहर तक का समय सरस्वती पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।
विशेष रूप से अभिजीत काल में पूजा करना अत्यंत फलदायी होता है।पूजा से पहले स्थानीय पंचांग देखकर मुहूर्त अवश्य सुनिश्चित करें।सरस्वती पूजा विधि (घर पर करने की सरल विधि: प्रातः स्नान और शुद्ध वस्त्र धारण करें
पीले या सफेद रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है। पूजा स्थल की तैयारी करें: माँ सरस्वती की मूर्ति या चित्र को स्वच्छ स्थान पर स्थापित करें। पूजा सामग्रीपीले फूल, अक्षत (चावल)
हल्दी, रोली,दीपक, धूप फल या मिठाई (पीले रंग की हो तो उत्तम) पूजन,दीप प्रज्वलित कर माँ सरस्वती को पुष्प अर्पित करें और मंत्र जाप करें। सरस्वती मंत्र:
ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः पुस्तक और वाद्य यंत्र अर्पण
किताबें, कॉपी, कलम, वाद्य यंत्र आदि माँ के चरणों में रखें।
प्रसाद वितरण पूजा के बाद प्रसाद सभी में वितरित करें।
बच्चों के लिए सरस्वती वंदना,सरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि। विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा॥
अर्थ:हे माँ सरस्वती! आप मुझे ज्ञान देने वाली हैं।
मैं अपनी शिक्षा का आरंभ कर रहा/रही हूँ, कृपया मुझे सफलता प्रदान करें। पीले रंग का महत्व और परंपराएं
बसंत पंचमी पर पीला रंग मुख्य केंद्र होता है। प्रकृति का श्रृंगार: खेतों में सरसों के पीले फूल खिलते हैं, जो नई फसल और खुशहाली का संकेत देते हैं।भोजन और वस्त्र: इस दिन पीले वस्त्र पहनना और केसरिया भात, पीले चावल या बेसन के लड्डू का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
शिक्षा और संस्कार: अक्षर अभ्यास: यह दिन “विद्यारंभ संस्कार” के लिए अबूझ मुहूर्त माना जाता है। छोटे बच्चों को पहली बार पेन या स्लेट पकड़ाई जाती है और उन्हें “ॐ” या वर्णमाला लिखना सिखाया जाता है। संगीत और कला के साधक अपनी वीणा, वाद्य यंत्रों और किताबों की पूजा करते हैं।बसंत ऋतु मौसमों का राजा: बसंत ऋतु को ‘ऋतुराज’ यानी मौसमों का राजा माना जाता है. यह पीलापन नई फसल के आने और जीवन में खुशहाली का प्रतीक माना जाता है. लोग प्रकृति के इसी सुंदर रूप के साथ स्वयं को जोड़ने की कोशिश करते हैं, इसलिए पीले वस्त्र धारण करते हैं. धार्मिक दृष्टि से पीला रंग शुद्धता, सादगी और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है. मां सरस्वती को ये रंग बहुत प्रिय है।
मानसिक स्पष्टता और एकाग्रता बढ़ती है मान्यताओं के अनुसार, पीला रंग पहनने से मानसिक स्पष्टता और एकाग्रता बढ़ती है. भक्त इस दिन पीले वस्त्र पहनकर और पीले फूल अर्पित करके मां सरस्वती का पूजन करते हैं. पीला रंग सकारात्मक ऊर्जा का कारक माना जाता है. ये रंग सूर्य के प्रकाश का प्रतिनिधित्व भी करता है. इस रंग से जीवन में शुभता आती है।आज हम आपको बसंत पंचमी और होली के बीच के धार्मिक कनेक्शन के बारे में बताएंगे।
बसंत ऋतु के साथ ही बसंत पंचमी का भी आगमन होता है। यह दिन संकेत होता है कि अब सर्दी जाने वाली है और बसंत ऋतु का आगमन हो रहा है। बसंत ऋतु के मौसम को ऋतुओं का राजा कहा जाता है,



