मुक्ति द्वार निश्चय जो खोले, जय जय जय शिव शंकर भोले।

आज श्रावण मास पर विशेष :

 

पूजन ,अर्चन ध्यान लगाते , शिव की कृपा भक्त वह पाते

भगवान शिव को समर्पित सावन मास का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। ऐसी मान्यता है कि आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि समाप्त होने के साथ आज से प्रारंभ श्रावण मास में जो भी भक्त भगवान शिव शंकर की पूजा आराधना वंदना और उनका ध्यान करते हैं। उन्हें भगवान शिव की कृपा अवश्य ही प्राप्त होती है।
इसी लिए सावन के पूरे माह भगवान शिव की विशेष पूजा के साथ व्रत रखने का विधान है। क्योंकि ये भगवान शिव का सबसे प्रिय माह है। इस पूरे माह भगवान शिव का जलाभिषेक करने से लेकर कावड़ यात्रा करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन माह के दौरान भगवान शिव की पूजा करने से कई गुना अधिक शुभ फलों की प्राप्ति होती है और हर तरह के दुख-दर्द से निजात मिल जाती है।
ज्योतिषाचार्य पंडितों के मुताबिक हिंदू पंचांग के अनुसार इस बार श्रावण मास कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि के साथ आज 11 जुलाई से आरंभ हो रहा है। इस बार श्रवण मास में चार सोमवार पड़ेंगे। 14 जुलाई को पहला सोमवार व्रत (गजानन संकष्टी चतुर्थी), 21 जुलाई को दूसरा सोमवार व्रत (कामिका एकादशी, 28 जुलाई को तीसरा सोमवार व्रत (विनायक चतुर्थी), 04 अगस्त को चौथा सोमवार व्रत पड़ेंगे। इसके साथ ही 15 जुलाई को सावन का पहला मंगला गौरी व्रत, 22 जुलाई को सावन का दूसरा मंगला गौरी व्रत, 29 जुलाई को सावन का तीसरा मंगला गौरी व्रत, 05 अगस्त को सावन का चौथा मंगला गौरी व्रत पड़ेगा। साथ ही सावन शिवरात्रि, प्रदोष व्रत, हरियाली अमावस्या, नाग पंचमी, हरियाली तीज और सावन पूर्णिमा ये सभी तिथियां शिवभक्तों के लिए अत्यंत पुण्यकारी मानी जाती हैं। इन दिनों विशेष रूप से जलाभिषेक और रुद्राभिषेक का महत्त्व होता है। खासकर शिवरात्रि पर कांवड़िए गंगाजल लाकर शिवलिंग का अभिषेक करते हैं।
इस संदर्भ में अगर तिथियों की बात करें तो 16 जुलाई को कर्क संक्रांति, 22 जुलाई को प्रदोष व्रत, 23 जुलाई को सावन शिवरात्रि पड़ेगी। 24 जुलाई की हरियाली अमावस्या, सावन अमावस्या, गुरु पुष्य योग होगा।

जैसा कि सर्व विदित है कि हरियाली तीज सावन में पड़ने वाला एक विशेष पर्व है जो 27 जुलाई को है। इस दिन महिलाएं हरे वस्त्र पहनती हैं, मेहंदी लगाती हैं और सौभाग्य व पति की दीर्घायु के लिए व्रत करती हैं। यह पर्व शिव-पार्वती के पुनर्मिलन का प्रतीक माना जाता है।
इसके बाद 29 जुलाई को नाग पंचमी, 30 जुलाई को कल्कि जयंती, 31 जुलाई को तुलसीदास जयंती, 05 अगस्त को सावन पुत्रदा एकादशी, 06 अगस्त को सावन प्रदोष व्रत, 08 अगस्त को हयग्रीव जयंती (वरलक्ष्मी व्रत), 09 अगस्त को भाई बहन के। अटूट प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन (सावन पूर्णिमा) होगा।
कुल मिलाकर भगवान शिव की आराधना का यह विशेष माह श्रावण भक्तों के लिए भगवान शिव के प्रति श्रद्धा का ऐसा अप्रतिम गहन आत्मिक भाव है , जिसमें वह सदैव डूबे रहना चाहते हैं। जिसका उद्देश्य है – मुक्ति द्वार निश्चय जो खोले, जय जय जय शिव शंकर भोले।

प्रस्तुति : *सुनील बाजपेई*
कवि, गीतकार,
लेखक एवं वरिष्ठ पत्रकार
कानपुरI

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