तृणमूल कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग की कार्य शैली एवं व्यवहार पर गंभीर सवाल उठाए
हमें बोलने का मौका नहीं दिया गया", आयोग पर बरसीं चंद्रिमा भट्टाचार्य और फिरहाद हकीम
अजित प्रसाद,कोलकाता |: चुनाव आयोग की फुल बेंच के साथ हुई बैठक के बाद तृणमूल कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने आयोग की कार्य शैली और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के व्यवहार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। बैठक से बाहर निकलते ही राज्य की मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य और मेयर फिरहाद हकीम ने आयोग पर पक्षपात और अपमानजनक व्यवहार का आरोप लगाया।चंद्रिमा भट्टाचार्य के गंभीर आरोपबैठक के विवरण साझा करते हुए मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने कहा कि आयोग के साथ चर्चा के दौरान उन्हें अपनी बात रखने का उचित अवसर नहीं दिया गया। उन्होंने निम्नलिखित प्रमुख बातें कहीं:वोटर लिस्ट में कटौती: हमने आयोग को बताया कि 63 लाख नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं और 60 लाख नाम अभी भी विचाराधीन हैं। आम जनता को इसका कारण नहीं बताया जा रहा है।मुख्य चुनाव आयुक्त का व्यवहार: चंद्रिमा भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि केवल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ही बोल रहे थे और उन्होंने तृणमूल प्रतिनिधियों को बोलने का मौका नहीं दिया। जब सवाल पूछे गए, तो वे क्षुब्ध (Angry) हो गए।सुप्रीम कोर्ट का हवाला: टीएमसी नेताओं के अनुसार, आयोग ने यह कहकर सवालों के जवाब देने से इनकार कर दिया कि मामला सुप्रीम कोर्ट में है। इस पर चंद्रिमा भट्टाचार्य ने पलटवार करते हुए कहा, “अदालत जाना हमारा अधिकार है और हमने कोर्ट जाकर सही किया है।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आयुक्त ने उनसे ‘चिल्लाओ मत’ (Don’t shout) जैसे शब्दों का प्रयोग किया।फिरहाद हकीम का प्रहारकोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम ने भी आयोग की कड़ी आलोचना की। उन्होंने सीधे तौर पर आयोग पर भाजपा के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया।नागरिकों का उत्पीड़न: फिरहाद हकीम ने कहा, “आपने भारतीय नागरिकों को परेशान किया है। लोगों को सिर्फ यह साबित करने के लिए कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है कि वे भारत के नागरिक हैं।”अधिकारों का हनन: उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि वोट देने का अधिकार हमारा मौलिक अधिकार है और किसी में भी इसे छीनने की शक्ति नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग भाजपा की बातों को सुनकर नागरिकों के अधिकारों के साथ खिलवाड़ कर रहा है।तनावपूर्ण माहौलइस बैठक के बाद राज्य की राजनीति में उबाल आ गया है। जहाँ एक ओर मुख्यमंत्री रेड रोड पर धरने पर बैठी हैं, वहीं दूसरी ओर आयोग के साथ हुई इस तल्ख बैठक ने तृणमूल और निर्वाचन आयोग के बीच के टकराव को और गहरा कर दिया है।



