आइमा एग्रीमैक इंडिया 2025 में केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने कृषि क्षेत्र में हरित ऊर्जा आधारित उपकरणों की वकालत की
प्रदर्शनी में 20,000 किसान, 4000+ घरेलू डीलर एवं वितरक, 100+ विदेशी खरीदार और 180+ कंपनियों ने लिया हिस्सा
• कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सहयोग से फिक्की और फेडरउनाकोमा द्वारा आयोजित कार्यक्रम सफलतापूर्वक हुआ सम्पन्न
• कार्यक्रम में कृषि मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भारत में इटली के राजदूत रहे मौजूद
*नई दिल्ली, 29 नवंबर, 2025:* फिक्की (FICCI) और इटली की कृषि क्षेत्र की इंडस्ट्री बॉडी फेडरउनाकोमा (FederUnacoma) ने भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के साथ कृषि-मशीनरी, उपकरण और एग्री-टेक समाधानों पर आयोजित 9वीं अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी और सम्मेलन ‘आइमा एग्रीमैक इंडिया 2025’ (EIMA Agrimach India 2025) का आज भविष्य में हरित ईंधन आधारित कृषि-मशीनरी पर फोकस करने की अपील के साथ सफलतापूर्वक समापन हुआ।
27-29 नवंबर, 2025 तक नई दिल्ली के IARI ग्राउंड, पूसा में आयोजित हुई इस प्रदर्शनी में अधिकतर उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और ओडिशा से आए लगभग 20,000 किसानों, 4000 से ज्यादा घरेलू डीलर और वितरकों, 180+ घरेलू और विदेशी कंपनियां, और अल्जीरिया, नेपाल, श्रीलंका, केन्या, ओमान, मलेशिया, मोरक्को, नाइजीरिया, युगांडा, वियतनाम, ज़िम्बाब्वे, साउथ कोरिया और थाईलैंड से आए 100+ विदेशी खरीदार शामिल हुए। जहां इटली इस प्रदर्शनी का साझीदार देश था, वहीं नीदरलैंड, जापान, अमेरिका और पोलैंड ने भी हिस्सा लिया। प्रदर्शनी में कृषि मशीनरी की एक बड़ी रेंज दिखाई गई, जो हमारे देश के किसानों के लिए बहुत फायदेमंद हो सकती है। इसके अलावा इस आयोजन ने कृषि क्षेत्र की पूरी वैल्यू-चेन को पूरा करने वाले भारतीय और विदेशी प्लेयर्स को बेहतरीन मौके मिले।
उद्घाटन सत्र में बोलते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव डॉ. देवेश चतुर्वेदी ने इंडस्ट्री से हरित-ईंधन आधारित मशीनरी को प्राथमिकता देकर भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए 2047 के विजन को साकार करने में अहम भूमिका निभाने और महिला किसानों का काम का बोझ कम करने के लिए जेंडर-न्यूट्रल कृषि उपकरण बनाने की अपील की।
उन्होंने अपने उद्घाटन भाषण में कहा, “अगले 5-10 सालों में हमें अपनी टेक्नोलॉजी को ग्रीन फ्यूल की तरफ ले जाना चाहिए, फिर वो चाहे बिजली से चलने वाले ट्रैक्टर हों या ग्रामीण CBG प्लांट के लिए उपलब्ध CBG (कम्प्रेस्ड बायोगैस) पर चलने वाली मशीनें हों। इस बदलाव से किसानों की रखरखाव और संचालन लागत दोनों कम होंगी। हमारी योजनाएं ग्रीन-फ्यूल-बेस्ड टेक्नोलॉजी को ज्यादा प्राथमिकता देंगी। हमें इटली के अपने इंडस्ट्री के साथियों से इस क्षेत्र में सहयोग करने करने की आशा है।”
विजन 2047 को साकार करने के लिए महिला किसानों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कृषि सचिव ने इंडस्ट्री का ध्यान जेंडर बजटिंग की ओर खींचा और उनसे जेंडर-फ्रेंडली उपकरण के प्रोडक्शन पर ध्यान देने के लिए कहा।
उन्होंने आगे बोलते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने 2026 को ‘इंटरनेशनल ईयर ऑफ़ विमेन फार्मर्स’ घोषित किया है। इसलिए उपकरणों को महिलाओं की मेहनत कम करने के लिए डिजाइन करने की जरूरत है। “अक्सर नीतियां बनाने वाले यह मान लेते हैं कि ‘जेंडर बजटिंग’ का मतलब सिर्फ महिलाओं को मशीनरी का मालिकाना हक देना है, लेकिन सिर्फ इससे मेहनत कम नहीं होती।” डॉ. चतुवेदी ने जोर देकर कहा, “खेती के अधिकतर मुश्किल काम महिलाएं करती हैं, इसलिए हमें ज्यादा जेंडर-फ्रेंडली इक्विपमेंट की जरूरत है, फिर चाहे वे मैनुअल हों या मोटर वाले, जो सच में उनका काम का बोझ कम करें।”
भारत में इटली के राजदूत श्री एंटोनियो बार्टोली ने उम्मीद जताई कि दोनों देशों के बीच खेती के क्षेत्र में आपसी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए जल्द ही भारत स्थित इटली के दूतावास में एक एग्रीकल्चर अटैची की नियुक्ति होने की आशा है।
आखिरी दिन प्रदर्शनी का अवलोकन करने आए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में संयुक्त सचिव श्री अंबालागन पी. ने प्रदर्शनी की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि बड़ी संख्या में किसानों का हिस्सा लेना और साथ ही घरेलू और विदेशी कंपनियों, डीलरों, डिस्ट्रीब्यूटरों की बड़ी मौजूदगी इस इवेंट की कामयाबी की कहानी कहती है।
श्री टी. आर. केसवन, चेयरमैन, आयोजन समिति, EIMA एग्रीमैक इंडिया और बोर्ड डायरेक्टर और ग्रुप प्रेसिडेंट, TAFE ने खेती को सेवा के तौर पर बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सिर्फ कुछ दिनों के लिए इस्तेमाल के लिए किसान के लिए एक सीडर खरीदना महंगा है, लेकिन कृषि सेवा के तौर पर सीडर मदद कर सकता है। इसलिए हमें कृषि को एक सेवा के तौर पर बढ़ावा देने की जरूरत है। इंडस्ट्री ने इस बारे में कृषि मंत्रालय से बात की है।
कृषि क्षेत्र में भारत-इटली के बीच सहयोग के भविष्य को लेकर फेडेरुनाकोमा की डायरेक्टर जनरल सुश्री सिमोना रापास्टेला काफी उत्साहित दिखीं और दोनों देशों के बीच इस क्षेत्र में बड़ी संभावनाओं पर अपनी बात रखी।
फिक्की की नेशनल एग्रीकल्चर कमेटी के को-चेयरमैन और कोर्टेवा एग्रीसाइंस के साउथ एशिया प्रेसिडेंट श्री सुब्रतो गीड ने कहा, “भारत के लिए अपने खाद्यान्न भविष्य को सुरक्षित करने के लिए उत्पादकता में सुधार करना बेहद जरूरी है। हमें किसानों को अच्छी गुणवत्ता के बीज और फसल के समाधान के लिए सही इनपुट देकर शुरुआत करनी चाहिए। हमें ऐसे आधुनिक तरीकों की जरूरत है, जो मेहनत को कम करें और कम लागत में अधिक उत्पादन दे। इस बदलाव में मशीनीकरण एक जरूरी हिस्सा है, जिसे टेक्नोलॉजी और सुधारों का लगातार सहयोग मिला है। ये कदम मिलकर एक मजबूत एग्रीकल्चर सिस्टम बना सकते हैं, जो किसानों और देश के लिए हितकर साबित हो।”
इस आयोजन के दौरान FICCI-PwC की रिपोर्ट ‘फार्म मैकेनाइजेशन: द पाथ टूवर्ड्स ए फ्यूचर-रेडी इंडिया’ भी जारी की गई।
इटली की ट्रेड एजेंसी की डिप्टी ट्रेड कमिश्नर सुश्री सबरीना मंगियालावोरी ने बताया कि भारतीय किसान जुताई, बुवाई, सिंचाई, फसल सुरक्षा और थ्रेसिंग जैसे आधुनिक मैकेनिकल तरीकों को अपना रहे हैं।
इस प्रदर्शनी का 10वां संस्करण अगले साल इटली में आयोजित होने वाला है।




