उत्तर बंगाल को दोहरी सौगात: रायगंज में एम्स, जलपाईगुड़ी में कैंसर हॉस्पिटल

 

*सिलीगुड़ी/रायगंज, 29 अक्टूबर।* उत्तर बंगाल में स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर बदलने जा रही है। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने गुरुवार को उत्तर दिनाजपुर के रायगंज से दो बड़े ऐलान किए। पहला – रायगंज के दिकनगर में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) स्थापित करने के लिए राज्य सरकार केंद्र को प्रस्ताव भेजेगी और दूसरा – जलपाईगुड़ी में एक अत्याधुनिक पूर्ण कैंसर अस्पताल बनाया जाएगा। यह घोषणा भाजपा के उस चुनावी वादे को पूरा करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है, जिसमें उत्तर बंगाल में एम्स लाने की बात कही गई थी।

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी गुरुवार को हेलीकॉप्टर से रायगंज पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले कर्णजोरा ऑडिटोरियम में जिले के आला अधिकारियों, सांसदों, विधायकों और दो राज्य मंत्रियों के साथ एक उच्चस्तरीय प्रशासनिक समीक्षा बैठक की। इसके बाद वे कर्णजोरा के तीस्ता मैदान में आयोजित जनसेवा वितरण कार्यक्रम और जनसभा में शामिल हुए। वहीं से उन्होंने ये घोषणाएं कीं।

*क्या है रायगंज एम्स का इतिहास?*

रायगंज में एम्स की मांग आज की नहीं, बल्कि 18 साल पुरानी है। 2008 में तत्कालीन केंद्र सरकार ने रायगंज में एम्स-जैसे संस्थान को मंजूरी दी थी। इसके लिए पानीशाला के सितग्राम मौजा में 150 एकड़ से अधिक जमीन भी चिन्हित की गई थी, लेकिन जमीन अधिग्रहण की पेचीदगियों के कारण मामला लटक गया। 2016 में तत्कालीन ममता बनर्जी सरकार ने इस प्रोजेक्ट को रायगंज से शिफ्ट कर नदिया जिले के कल्याणी में ले जाने का फैसला किया। आज कल्याणी ही राज्य का एकमात्र संचालित एम्स है।

इस फैसले के खिलाफ रायगंज में बड़े आंदोलन हुए। रायगंज मर्चेंट एसोसिएशन ने एनएच-34 जाम से लेकर कई विरोध प्रदर्शन किए। विधानसभा चुनाव 2026 में भाजपा ने अपने घोषणापत्र में साफ तौर पर कहा था कि सत्ता में आने पर उत्तर बंगाल में एम्स की स्थापना की जाएगी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी अपनी चुनावी सभा में इसका वादा किया था।

अब मुख्यमंत्री ने कहा, “बंगाल सरकार ने तय किया है कि दिकनगर में एम्स के लिए केंद्र को प्रस्ताव भेजा जाएगा।” सूत्रों के मुताबिक प्रस्तावित जगह द्वीपनगर-पानीशाला इलाके में है, जहां 101 एकड़ जमीन उपलब्ध है। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि वे जल्द ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा के साथ मिलकर इस परियोजना की आधारशिला रखेंगे।

*जलपाईगुड़ी को कैंसर अस्पताल की सौगात*

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा, “मैं जलपाईगुड़ी के लोगों को निराश नहीं करूंगा।” उत्तर बंगाल में कैंसर के मरीजों को इलाज के लिए कोलकाता या टाटा मेमोरियल जैसे बड़े शहरों में जाना पड़ता है। इस दर्द को समझते हुए उन्होंने जलपाईगुड़ी में एक पूर्ण, अत्याधुनिक कैंसर अस्पताल बनाने की घोषणा की। इससे पूरे उत्तर बंगाल, निचले असम और बिहार के सीमावर्ती जिलों के लाखों लोगों को फायदा होगा।

*स्वास्थ्य और शिक्षा की बदहाली पर उठाए सवाल*

प्रशासनिक बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर चिंता जताई। उन्होंने कहा, “उत्तर दिनाजपुर में एक विश्वविद्यालय है, लेकिन बुनियादी ढांचा नहीं। एक मेडिकल कॉलेज और अस्पताल है, लेकिन वहां कैथ लैब नहीं है, एक भी न्यूरोलॉजिस्ट नहीं है, पर्याप्त आईसीयू बेड नहीं हैं। पूरे जिले में सिर्फ दो ट्रॉमा केयर एम्बुलेंस हैं। पिछले कई सालों में क्या काम हुआ है, यह समझ से परे है।”

उन्होंने अधिकारियों को साफ निर्देश दिया कि आवास योजना, जल जीवन मिशन, रोजगार सृजन जैसी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और काम में तेजी लाई जाए।

*सीमा सुरक्षा, सीएए और जमीन पर कब्जे पर भी बोले*

तीस्ता मैदान की सभा में मुख्यमंत्री ने सीमावर्ती जिले होने के नाते सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि बॉर्डर इलाकों में अवैध मदरसों को नहीं चलने दिया जाएगा और राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई होगी।

उन्होंने कहा कि चिन्हित घुसपैठियों को होल्डिंग स्टेशन में रखकर कानूनी प्रक्रिया के तहत वापस बांग्लादेश भेजा जाएगा। वहीं, नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के तहत पात्र हिंदू शरणार्थियों से उन्होंने अपील की कि वे निर्धारित प्रक्रिया से आवेदन करें, उन्हें जेल नहीं जाना पड़ेगा, सरकार उन्हें नागरिकता दिलाने में मदद करेगी।

इसके अलावा उन्होंने चोपड़ा, इस्लामपुर, गोआलपोखर, चाकुलिया जैसे क्षेत्रों में सरकारी और आदिवासी जमीन पर अवैध कब्जे और निर्माण के मामलों की जांच कर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए।

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