राहुल गांधी को कम से कम राजीव गांधी के संस्कारों का ध्यान रखना चाहिए!
सामयिकी :

राजीव कुमार झा
बिहार में कांग्रेस को आत्मविश्वास क़ायम करना चाहिए और आगे अकेले अपने बलबूते पर चुनाव लड़ ना चाहिए। तेजस्वी यादव के साथ राहुल गांधी का बिहार भ्रमण शोभा नहीं देता और और उनके साथ बिहार भ्रमण पर निकले राहुल गांधी को देखकर ऐसा लगता है मानो तेजस्वी यादव उनको अपने उपनिवेश यहां अपने शासन काल नजारा दिखा रहे हों। राहुल गांधी देश के शीर्षस्थ नेताओं में शामिल हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री पद को ठुकरा कर दुनिया की राजनीति में त्याग और समर्पण का मिसाल पेश किया था। बिहार में भाजपा विरोध के नाम पर लालू प्रसाद की पार्टी से हाथ मिलाना उनकी सबसे बड़ी भूल है। उनको बिहार में अकेले अपने बलबूते पर चुनाव लड़ना चाहिए और यहां कांग्रेस पार्टी का पुनर्गठन करके नये नेताओं के हाथ में पार्टी की कमान को सौंपना चाहिए। विजय माल्या को देश से यहां से भगाने वाली कांग्रेस को ब्रिटिश अदालत के द्वारा भारत सरकार को माल्या की ब्रिटेन में स्थित परिसंपत्तियों के हस्तांतरण के फैसले से देश में भाजपा की साख फिर क़ायम हो रही है।
कांग्रेस किसानों मजदूरों और देश के जन-सामान्य की पार्टी बने इसका ख्याल रखा जाना जरूरी है। कांग्रेस को हर घर झंडा की जगह हर घर चर्खा शुरू कराना जरूरी है ताकि खादी के प्रचार प्रसार से कांग्रेस देश में नयी पहचान कायम करे। बिहार किसी का उपनिवेश नहीं है। मनोज तिवारी ने अपने नये गाने में सही कहा है कि यह संस्कार की भूमि है और राहुल गांधी को कम से कम राजीव गांधी के संस्कारों का ध्यान रखना चाहिए।



