तहि प्रकाश हमारा भयो, पटना शहर विखे भव लयो : सवा लाख से एक लड़ाऊं, चिड़ियन ते मैं बाज तुड़ाऊं, तबै गुरु गोबिंद सिंह नाम कहाऊं…!

 

कानपुर, शनिवार। खालसा पंथ के संस्थापक दशमेष पिता साहिब श्री गुरू गोबिंद सिंह जी महाराज का पावन प्रकाश पूरब आज पूर्ण गुरू मर्यादा, उत्साह, श्रद्धा एवं भक्तिभाव से मनाया गया, भीषण ठंड की परवाह किए बिना भारी संख्या में स्त्री पुरुष और बच्चे प्रातः काल से ही कतार बद्ध हो श्रद्धालू रूप में श्री गुरू ग्रन्थ साहिब जी के समक्ष माथा टेक कर सरबंसदानी गुरू के प्रति अपनी श्रद्धा समर्पित कर रहे थे। श्री गुरू सिंह सभा कानपुर के तत्वाधान में एवं सभी सिख संगठनों , गुरुद्वारा कमेटियों व समूह साध संगत के सहयोग से श्री गुरू गोबिंद सिंह जी का पावन प्रकाश पूरब मनाने के लिए सभी धर्मों एवं वर्गों के लोगों ने मोतीझील के विशाल पंडाल में भव्य आसन पर विराजमान श्री गुरू ग्रन्थ साहिब के समक्ष शीश निवाने के साथ साथ गुरुवाणी कीर्तन एवं गुरुवाणी विचार से निहाल हो गुरू के अतुट लंगर ग्रहण किए ।
दशमेष पिता के गुरू पर्व के मुख्य दीवान का आरम्भ प्रातः 03.30 बजे साध संगत सुखमनी साहिब चौक द्वारा श्री सुखमनी साहिब के पाठ से हुई, तत्पश्चात “आनन्द साहिब” एवं अमृत वेले की अरदास सम्पन्न हुई, गुरू नानक संगीत जत्था ने “नितनेम” किया तो “बीबी इंदर कौर”, गुरू गोबिंद सिंह स्टडी सर्किल, “भाई सुरिंदर सिंह भाई मोहन सिंह”, प्रेमी जत्था गुरुद्वारा कीर्तनगढ़, “भाई कुलदीप सिंह राजा”, “भाई भूपिंदर सिंह गुरदासपुरी” हजूरी रागी जत्था गुरुद्वारा श्री गुरु तेग बहादुर चौक के जत्थों ने “आसा दी वार” का गायन किया। भाई सुरजीत सिंह गंभीर दिल्ली वालों ने “बादशाह दरवेश गुरु गोबिंद सिंह”, भाई जगतार सिंह” जी हजूरी रागी ” श्री दरबार साहिब अमृतसर ने “जे धरती भई हरियावली, जित्थे मेरा सतगुरु बैठा आए”, ” तहि प्रकाश हमारा भयो, पटना साहिब विखे भव लयो”..!” का अपनी मोहक अंदाज में गायन करते हुए संगत को निहाल किया। गुरमत विचार करते हुए ज्ञानी हरप्रीत सिंह मक्खो लुधियाना वालों ने गुरू गोबिंद सिंह जी के जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि गुरु साहिब ने बाल्य काल में माता द्वारा पहनाए गए सोने के कंगन नदी में फेंक दिए, माता द्वारा इसका कारण पूछने पर उन्होंने सहज उत्तर दिया कि वह समाज में बराबरी स्थापित करने के लिए ही आए हैं और समाज के हर क्षेत्र में समानता ही उनका उद्देश्य है, गुरु जी ने जीवन के अंतिम समय तक इसका पालन किया और अपने को उच्च बता कर बलात धर्मांतरण के खिलाफ लड़ते हुए अपना सर्ववंश अर्पण कर कर सर्ववंशदानी कहलाए, यही समानता अमृतपान के माध्यम से भी साबित कर गुरु साहिब ने बाल्य काल में अपनी माता से कहे वचनों को अंत समय तक निभाया।
श्री दरबार साहिब अमृतसर के हजूरी रागी भाई शुभ दीपसिंह ने “गुरु बिन घोर अंधार गुरु बिन समझ न आवे”, “राजन के राजा महा साजन के साजा” का समधुर गायन कर संगत को निहाल किया। ” तहि प्रकाश हमारा भयो, पटना साहिब विखे भव लयो”..!”
इस अवसर पर सांसद रमेश अवस्थी, विधायक अमिताभ बाजपेई, नीलिमा कटियार, नसीम सोलंकी, पूर्व विधायक इरफान सोलंकी डी सी पी सेंट्रल श्री सरवन कुमार सिंह ने प्रकाश पूरब पर मोतीझील पहुंच गुरु ग्रन्थ साहिब के समक्ष माथा टेकर गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित की। प्रदेश के उप मुख्यमंत्री श्री बृजेश पाठक, मंडलायुक्त श्री वी पाण्डेय, जिलाधिकारी श्री जितेंद्र प्रताप सिंह, पुलिस आयुक्त श्री रघुवीर लाल, श्री विनोद कुमार सिंह, श्री आशुतोष कुमार सिंह ज्वाइंट पुलिस आयुक्त, श्री महेश कुमार सिंह ए डी सी पी एल आई यू आदि ने इस अवसर पर भेजे अपने शुभकामना संदेशों में महान गुरु को नमन करते हुए मानवता के प्रति उनके महान कार्यों का उल्लेख किया। श्री अकाल तख्त साहिब जी के निर्देशों के अनुरूप प्रकाश पूरब के साथ ही चल रहे शहीदी सप्ताह के चलते इस बार दीवान में आए अतिथियों को सम्मानित नहीं किया गया
मुख्य पंडाल के बाहर स्त्री पुरुषों के लिए बनाए गए अलग अलग लंगर पंडालों में लाखों लोगों ने “एक पंगत एक संगत” को चरितार्थ करते हुए सभी धर्मों एवं वर्गों के श्रद्धालुओं ने बिना किसी भेदभाव के लंगर छका, लंगर में श्रद्धालुओं को दाला (दाल), भाजा (सब्जी), प्रसादा (रोटी), देसी घी से बना कढ़ाह प्रशाद (हलवा), सलाद व बोतल बंद पानी वितरित किया गया।
गुरू पर्व आयोजन में यंग मैन सिख एसो. ने जोड़ों (जूते चप्पल), दशमेश शस्त्र दल ने लंगर के प्रवेश द्वारों की, बीर खालसा दल ने दो पहिया वाहनों, गुर सेवक जत्था, कबाड़ी बाजार एसो. गुरु नानक मोटर मार्केट आदि ने लंगर वितरण, श्री हेमकुंड सेवा सोसाइटी, दीप सेवा दल, यूथ खालसा दल, रामगढ़िया सभा ने पेयजल व्यवस्था की जिम्मेदारियों का निर्वाह किया।
श्री गुरू सिंह सभा के अध्यक्ष स. हरविंदर सिंह लार्ड, स. सुखविंदर सिंह भल्ला लाडी, मोहन सिंह झास, सुरजीत सिंह लॉर्ड, हरमिंदर सिंह लोंगोवाल, करमजीत सिंह, मीतू सागरी, ज्ञानी मदन सिंह, दया सिंह गांधी, जसबीर सिंह सलूजा, तरलोचन नारंग, टीटू सागरी, अमनजोत सिंह रौनक, पोपी भाटिया, मोकम सिंह, गुरदेव सलूजा, सुरिंदर सिंह चावला, परमवीर सिंह गंभीर, देवेंद्रपाल सिंह अरोरा, सतनाम सिंह सूरी, परमजीत सिंह पम्मी आदि ने गुरू पर्व समारोह की सफलता के लिए अपने दायित्वों का निर्वाह किया।
दीवान का संचालन महेन्द्र सिंह भाटिया जैक वालों ने किया।
इसी प्रकार रात के दीवान में सभी रागी जत्थों एवं प्रचारकों ने गुरुवाणी विचार के पश्चात आरती, आगमन के शब्दों एवं मध्यरात्रि अरदास के साथ तीन दिवसीय गुरु पर्व का समापन हो गया। सिख बहुल्य क्षेत्रों में गुरू पर्व के पावन अवसर पर व्यापक दीपमाला कर सरबंसदानी गुरू को नमन किया गया। गुरू पर्व समारोह की समाप्ति अरदास से हुई अरदास में सरबत के भले के प्रार्थना के साथ गुरुपर्व के सफलता पूर्वक सम्पन्न होने का शुक्राना अदा किया गया।

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