पोस्टमार्टम के लिए कानपुर में लाशों का अंबार, मतलब आत्मा के जाने के बाद उसके घर शरीर की दुर्दशा !

 

सुनील बाजपेई
कानपुर। जन्म के बाद इस संसार में कुछ भी होने, बनने और करने का कारण आत्मा का शरीर धारण करना ही है। और जब इस शरीर की निष्क्रिय यानी मृत्यु के रूप में वह आत्मा शरीर को छोड़ देती है तो फिर उसकी शांति के लिए अनेक अनेक कर्मकांड भी किए जाते हैं लेकिन अगर सांसारिक व्यवस्थाओं और
कारणों को लेकर शव के पोस्टमार्टम जैसी अनिवार्यता होती है तो फिर ऐसा करने के अधिकारी और सक्षम शरीर धारी मतलब धरती के दूसरे भगवान कहे जाने वाले डॉक्टर की भी जरूरत होती है। और जब भी वे अपने कर्तव्य का पालन समय से नहीं करते तो फिर उस आत्म विहीन यानी निर्जीव शरीर को दुर्दशा होने जैसे हालातो से भी गुजरना पड़ता है।
यह कथन कानपुर के संदर्भ में भी सटीक बैठता है क्योंकि यहां आज शुक्रवार को पोस्टमॉर्टम हाउस पर लाशों की लाइन लग गई। परिजन पोस्टमॉर्टम के इंतजाम में घंटों बैठे रहे। इधर-उधर दौड़ते रहे। लेकिन, डॉक्टर ही नहीं पहुंचे तो पोस्टमॉर्टम कैसे हो।
मिली जानकारीके मुताबिक शुक्रवार सुबह 10 बजे से तीन डॉक्टरों की ड्यूटी थी। मगर, सिर्फ एक डॉक्टर पहुंच सकीं। बाकी दो डॉक्टर दोपहर 2 बजे तक पोस्टमॉर्टम हाउस पहुंचे ही नहीं। पोस्टमॉर्टम हाउस में 16 शव पहुंच चुके थे।
कोई सुनवाई न होने पर परिजनों ने हंगामा करने के साथ ही सी एम ओ से फोन पर शिकायत की जिसके बाद सी एम ओ ने भी फोन पोस्टमॉर्टम हाउस के प्रभारी से वजह पूछी तो प्रभारी ने डॉक्टरों के नहीं आने की जानकारी दी।
अवगत कराते चलें कि आज शुक्रवार को भीषण ठंड में अलग-अलग स्थानों पर हुए सड़क हादसों और अन्य कारणों से हुई मौतों के बाद पोस्टमॉर्टम हाउस में सुबह से भीड़ जुटने लगी। दोपहर 2 बजे तक कोतवाली, साढ़, सजेती, छावनी, बाबूपुरवा, कर्नलगंज, चौबेपुर, महाराजपुर, स्वरूप नगर थाना क्षेत्रों से 16 शव पोस्टमॉर्टम हाउस पहुंचे। पीड़ित परिजन अपने-अपने शवों के इंतजार में घंटों ठंड में ठिठुरते रहे। कुल मिलाकर घंटों बाद शवों का पोस्टमार्टम शुरु किया गया। इस बीच सबसे बद नसीब लावारिश शव नजर आए, जिनके लिए कहने और आंसू बहाने वाला कोई था ही नहीं।

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