कोलकाता में स्वास्थ्य व्यवस्था के रीढ़ की मानी जाने वालीआशा कार्यकर्ताओं ने ‘स्वास्थ्य भवन’ किया घेराव

15,000 वेतन और बकाये की मांग को लेकर भारी प्रदर्शन

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अजित प्रसाद,कोलकाता  : पश्चिम बंगाल की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली आशा कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर आज राजधानी कोलकाता में हुंकार भरी है। ‘पश्चिम बंगाल आशा कर्मी यूनियन’ और ‘पश्चिम बंगाल नगर पालिका स्वास्थ्य कार्यकर्ता (संविदात्मक) यूनियन’ के आह्वान पर आज हजारों की संख्या में आशा कार्यकर्ताओं ने साल्ट लेक स्थित स्वास्थ्य भवन (Swasthya Bhawan) का घेराव किया।

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अपनी विभिन्न मांगों के समर्थन में आशा कार्यकर्ता पिछले साल 23 दिसंबर 2025 से ही राज्यव्यापी कार्य बहिष्कार (Strike) पर हैं। आज उनकी इस हड़ताल का 16वां दिन है। उत्तर बंगाल की पहाड़ियों से लेकर दक्षिण के सुंदरवन तक, राज्य के हर कोने से आई कार्यकर्ताओं ने अपनी एकजुटता दिखाते हुए सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं ने सरकार के सामने निम्नलिखित मुख्य मांगें हैं आशा कार्यकर्ताओं के लिए मासिक न्यूनतम भत्ता बढ़ाकर 15,000 रुपये किया जाए।ड्यूटी के दौरान मृत्यु होने पर कार्यकर्ता के परिवार को 5 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। पिछले कई महीनों से लंबित सभी बकाये (Arrears) का तुरंत भुगतान हो और उन्हें नियमित छुट्टियों की सुविधा मिले।लगातार 16 दिनों से जारी इस हड़ताल के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में टीकाकरण, प्रसव पूर्व देखभाल और अन्य बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब तक सरकार लिखित में उनकी मांगों को स्वीकार नहीं करती, उनका आंदोलन और तेज होगा।स्वास्थ्य भवन के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेड्स लगाए गए हैं, जिससे इलाके में काफी तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। यूनियन नेताओं का स्पष्ट संदेश है कि वे अब और आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहते हैं।

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