न्यूजलपाईगुड़ी में रेल हॉकरों का ‘दमनकारी नीति’ के खिलाफ फूटा गुस्सा
रेलवे के खिलाफ INTTUC का हल्ला बोल
सिलीगुड़ी पश्चिम बंगाल ;रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में सामान बेचकर अपना गुजर-बसर करने वाले हॉकरों के खिलाफ रेलवे द्वारा की जा रही कड़ी कार्रवाई के विरोध में INTTUC (इंडियन नेशनल तृणमूल ट्रेड यूनियन कांग्रेस) ने मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को एनजेपी स्टेशन पर सैकड़ों हॉकरों ने अपने परिवार और रोजी-रोटी के संकट को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया।प्रदर्शनकारी हॉकरों का आरोप है कि स्टेशन परिसर या ट्रेनों में चाय, घुघनी और रोटी-सब्जी जैसे छोटे व्यापार करने पर रेल विभाग द्वारा भारी जुर्माना वसूला जा रहा है। जुर्माने की राशि एक हजार रुपये से अधिक होने के कारण गरीब हॉकर कर्ज के जाल में फंस रहे हैं। कई हॉकर पकड़े जाने के डर से काम पर नहीं जा पा रहे हैं, जिससे उनके घरों में चूल्हा जलना मुश्किल हो गया है।
हॉकर अपने व्यापार के सामान (केतली, टोकरी आदि) के साथ एडीआरएम (ADRM) कार्यालय के सामने जमा हुए और गेट पर ही धरने पर बैठ गए। इस आंदोलन का नेतृत्व INTTUC एनजेपी शाखा के अध्यक्ष सुजय सरकार ने किया। उन्होंने रेलवे प्रशासन पर गरीब विरोधी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन का काम व्यवस्था सुधारना है, न कि गरीबों का निवाला छीनना।
प्रदर्शन के बाद एक प्रतिनिधिमंडल ने एडीआरएम अजय सिंह को एक स्मारपत्र (Memorandum) सौंपा। सुजय सरकार ने मीडिया को बताया:
“हमने रेलवे को सात दिनों का समय दिया है। यदि एक सप्ताह के भीतर हॉकरों पर जुर्माना लगाने और उन्हें प्रताड़ित करने की नीति बंद नहीं हुई, तो हम काम बंद कर देंगे और रेलवे का चक्का जाम करने के लिए मजबूर होंगे।”रेलवे प्रशासन ने फिलहाल स्मारपत्र स्वीकार कर लिया है, लेकिन अब देखना यह है कि सात दिनों की समय सीमा के भीतर क्या कोई बीच का रास्ता निकल पाता है।



