बिहार: नीतीश कुमार युग का अंत
बिहार को चतुर्दिक विकास के पथ पर आगे ले जाने का दायित्व अब भाजपा को निभाना होगा।
राजीव कुमार झा
राज्य सभा के चुनाव में बिहार से जदयू उम्मीदवार के रूप में नीतीश कुमार के नामांकन के बाद अब सर्वत्र यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि बिहार में भाजपा जदयू के साथ सरकार का गठन करने जा रही है। मेरे इस कथन का निहितार्थ स्पष्ट है। दरअसल लोकतंत्र में सरकार का गठन वहां की विधायिका और उसके अंतर्गत जनता की प्रतिनिधि सभा के तौर पर स्थापित सदन यानी संसद और इसकी उपसभा के रूप में विधानसभा करती है और इसमें किसी पार्टी को स्पष्ट जनादेश नहीं होने की दशा में सबसे बड़ी पार्टी को अन्य दलों से समर्थन लेकर सरकार गठन का संवैधानिक अधिकार प्राप्त होता है। यहां इसी अर्थ में बिहार में जदयू सरकार अथवा भाजपा सरकार की चर्चा मैं कर रहा हूं।
यद्यपि बिहार में इसके कुछ अंतर्विरोध भी रहे। नीतीश कुमार की पार्टी जदयू बिहार विधानसभा में में सबसे बड़ी पार्टी कभी नहीं रही। यहां सबसे बड़ी पार्टी के रूप में कभी भाजपा तो कभी राजद और कभी भाजपा का अस्तित्व रहा।
लेकिन राजद सरकार के कुशासन से सदैव घृणा का भाव
क़ायम रखने वाली भाजपा ने राजद को सरकार गठन से बाहर रखने के लिए नीतीश कुमार को समर्थन देकर और मुख्यमंत्री पद पर आसीन रखकर बिहार की राजनीति में एक नये युग का सूत्रपात किया।
बिहार में लालू युग खत्म होने के बाद अब तक नीतीश कुमार के नेतृत्व में जदयू की सरकार भाजपा के समर्थन और सहयोग से शासन कार्य चला रही थी लेकिन अब नीतीश कुमार के द्वारा राज्य सभा चुनाव के उम्मीदवार के रूप में नामांकन पत्र दाखिल करने से यह स्पष्ट हो गया है कि शायद बिहार में मुख्यमंत्री के पद को नीतीश कुमार छोड़ने वाले हैं और यहां नया नेता मुख्यमंत्री पद पर आसीन होगा। बिहार में भाजपा की राजनीति की सकारात्मक भूमिका से इंकार नहीं किया जा सकता है।
भाजपा ने बिहार में यहां के सामाजिक – राजनीतिक परिवेश में समरसता के भावों का संचार किया और भ्रष्ट बेईमान नेताओं के खिलाफ निर्णायक जंग का ऐलान किया। बिहार तरक्की के रास्ते पर आगे बढ़ा और यहां पिछड़ों दलितों और मुसलमानों के तथाकथित मसीहा अपनी छल छद्म और झूठ फरेब की राजनीति से निरंतर हाशिए पर चले गए। पिछले विधानसभा चुनावों में बिहार में राजद की करारी हार हो गयी। इसके साथ बिहार में एक युग शुरू हुआ और अब इसकी अगुवाई का दायित्व भाजपा के कंधों पर दारोमदार होता दिखाई दे रहा है।
बिहार की जनता के जीवन में यह एक महत्वपूर्ण अवसर है और अब यहां उसे अपने नये नेता के नेतृत्व को साथ देने का संकल्प लेना होगा।
यह तय है कि बिहार में भाजपा अपने संकल्प पर खरी उतरेगी और इस पार्टी की सरकार के सामने पिछड़ेपन के अभिशाप से बाहर निकालने की चुनौती बेहद निर्णायक होगी।



