युद्ध की मार और गैस संकट से ‘माँ कैंटीन’ पर लगा ताला;

 

* मुरी (मुरमुरा) खाकर दिन काट रहे सैकड़ों असहाय और दृष्टिहीन
* मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ड्रीम प्रोजेक्ट ‘माँ कैंटीन’ पिछले तीन दिनों से बंद है।

अजित प्रसाद,
बशीरहाट (पश्चिम बंगाल ) : ईरान और इजरायल के बीच छिड़े युद्ध का सीधा और दर्दनाक असर अब बशीरहाट के गरीबों की थाली पर पड़ने लगा है। ईंधन संकट और एलपीजी (LPG) गैस की किल्लत के कारण मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ड्रीम प्रोजेक्ट ‘माँ कैंटीन’ पिछले तीन दिनों से बंद है। बुधवार (11 मार्च) से जारी इस गतिरोध के कारण बशीरহাট टाउन हाई स्कूल के पास स्थित इस कैंटीन से हर दिन पेट भरने वाले सैकड़ों असहाय, दृष्टिहीन और दिहाड़ी मजदूर भूखे पेट लौटने को मजबूर हैं।

बशीरहाट नगर पालिका द्वारा संचालित इस कैंटीन की सुपरवाइजर सुनंदा पुजारी और उनके साथियों ने बताया कि युद्ध के कारण गैस की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है और कीमतें आसमान छू रही हैं। कैंटीन में वैकल्पिक ईंधन (जैसे लकड़ी या कोयला) पर खाना बनाने की कोई व्यवस्था नहीं है। गैस न मिलने के कारण मजबूरी में रसोई बंद करनी पड़ी है।

इस कैंटीन में प्रतिदिन लगभग 300 लोगों के लिए अंडा, दाल, चावल और सब्जी पकाई जाती थी। मात्र 5 रुपये में मिलने वाला यह भोजन इलाके के उन दुखी और लाचार लोगों का एकमात्र सहारा था, जिनके पास दो वक्त की रोटी का कोई और साधन नहीं है।

भोजन के लिए आए एक दृष्टिहीन बुजुर्ग ने नम आंखों से कहा, “हमारा जीवन इस माँ कैंटीन के सहारे ही चल रहा था। पिछले तीन दिनों से हम यहाँ आते हैं और खाली हाथ लौट जाते हैं। अब मुरी (मुरमुरा) खाकर दिन गुजार रहे हैं। पता नहीं फिर से यहाँ गरम चावल कब नसीब होगा।”

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