जन वितरण प्रणाली में आकंठ भ्रष्टाचार
-दिल्ली में राशन दुकानदार की मनमानी

-सात साल से नहीं चढ़ाया गया कोई नाम
-एक नाम चढ़ाने की एक हजार घूस की मांग
भारत पोस्ट न्यूज़ नई दिल्ली। भारत सरकार द्वारा चलाई जा रही जन वितरण प्रणाली आकंठ भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया है। नाम चढ़ाने से लेकर राशन वितरण तक खुलेआम धांधली होती है। सरकार द्वारा बार-बार घोषणा की जाती है कि राशन के रुप में गैहूं, चावल, चीनी, दालें आदि उपभोक्ताओं मिलेगा, लेकिन राशन दुकानदार नहीं देता है। सरकार की घोषण को झूठा करार दिया जाता है। देश की राजधानी दिल्ली में राशन दुकानदार की मनमानी है।
उल्लेखनीय है कि सरकार द्वारा घोषणा की गई थी कि अप्रैल में तीन महीने का राशन इकट्ठे दिया जाएगा, लेकिन राशन दुकानदारों ने पहले जैसा ही एक महीना का ही राशन, वह भी मात्र गैहूं और चावल दिया। यहां यह गौरतलब है कि पूर्वी दिल्ली के त्रिलोकपुरी के दुकानदार और स्थानीय एफएसओ की मिलीभगत से गोरख धंधा खुलेआम चलता है। यहां के राशन दुकानदार महीना में एक-दो दिन ही दुकान खोलते हैं। जो राशन ले लिया और जो नहीं ले पाया उसे दुबारा राशन नहीं दिया जाता है। स्थानीय राशन ऑफिस में नया नाम चढ़ाने की रिश्वत राशि तय है। जो एक हजार रुपये देता है उसका नाम चढ़ा दिया जाता है और जो नहीं देता है उसे यह कहकर टाल दिया जाता है कि अभी 2019 के ही नाम चढ़ाये जा रहे है।
एक उपभोक्ता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मैंने 2019 में बच्चों के नाम चढ़ाने का फार्म भरकर दिया था। तब से अब तक आठ बार राशन ऑफिस जाकर एफएसओ से अनुरोध कर चुका हूं और हर बार वही रटा-रटाया जबाव मिलता है। हमारे राशन दुकानदार ने कहा कि आप एक हजार रुपये दो आपके बच्चे का नाम चढ़ जाएगा। यह सब प्रशासन के उच्च अधिकारियों को भी पता है, लेकिन कार्रवाई नहीं होती है। क्या सरकार ऐसे भ्रष्ट एफएसओ और राशन दुकानदारों कार्रवाई करेगी।

