पेट्रोल-डीजल 3-3 रुपये हुए महंगे हुए, नई कीमतें लागू, कंपनियों को अभी भी 25-30 रुपये का घाटा
नई दिल्ली. पेट्रोल और डीजल 3-3 रुपए प्रति लीटर महंगा हो गया है. दिल्ली में अब पेट्रोल 97.77 रुपए प्रति लीटर में मिलेगा. डीजल की कीमत 90.67 रुपए प्रति लीटर हो गई है. नए दाम आज 15 मई से लागू हो गए हैं. करीब 2 साल बाद दामों में ये बढ़ोतरी की गई है.
वहीं कंपनियों को अभी भी पेट्रोल-डीजल पर 25-30 रुपये प्रति लीटर का घाटा हो रहा है. पेट्रोल और डीजल की कीमतों के साथ प्रमुख शहरों में सीएनजी भी 2 रुपये प्रति किलो तक महंगी हो गई हैं. दिल्ली में अब एक किलो सीएनजी के लिए 79.09 रुपये खर्च करने होंगे.
अन्य चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं
मालभाड़ा बढ़ेगा: ट्रक और टेम्पो का किराया बढ़ जाएगा, जिससे दूसरे राज्यों से आने वाली सब्जियां, फल और राशन महंगे हो जाएंगे.
खेती की लागत: ट्रैक्टर और पंपिंग सेट चलाने के लिए किसानों को ज्यादा खर्च करना होगा, जिससे अनाज की लागत बढ़ेगी.
बस-ऑटो का किराया: सार्वजनिक परिवहन और स्कूल बसों के किराए में भी इजाफा देखने को मिल सकता है.
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी इसलिए थी जरूरी
इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव है. ईरान और अमेरिका की जंग शुरू होने से पहले क्रूड ऑयल के दाम 70 डॉलर थे जो अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं. क्रूड की कीमतें बढऩे से तेल कंपनियां दबाव में थीं. इसलिए कंपनियों ने घाटे की भरपाई के लिए यह कदम उठाया है. अगर कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी बनी रहती है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें और भी बढ़ाई जा सकती हैं.
पड़ोसी देशों में बढ़े दाम, भारत में अब हुआ इजाफा
सरकार अब तक यह तर्क देती रही थी कि पश्चिम एशिया युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में उछाल आया है. इसके चलते पाकिस्तान, नेपाल और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें 15% से 20% तक बढ़ गईं, लेकिन भारतीय उपभोक्ताओं पर इसका बोझ नहीं डाला गया.
2024 से दाम नहीं बदले थे, चुनाव से पहले कटौती हुई थी
देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें मार्च 2024 से स्थिर बनी हुई थीं. लोकसभा चुनाव 2024 से ठीक पहले सरकार ने कीमतों में ?2 प्रति लीटर की कटौती कर जनता को राहत दी थी. हालांकि, तकनीकी रूप से भारत में ईंधन की कीमतें विनियमित हैं और कंपनियां अंतरराष्ट्रीय क्रूड की 15 दिनों की औसत कीमत के आधार पर हर दिन रेट बदल सकती हैं, लेकिन राजनीतिक संवेदनशीलता के कारण इन्हें लंबे समय तक नहीं बदला गया.
तेल कंपनियों को हर महीने 30 हजार करोड़ का घाटा हो रहा था
सरकार के मुताबिक, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण घाटे में चल रही थीं. पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा के अनुसार कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री पर हर महीने करीब 30,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है .



