उप्र विधानसभा चुनाव को लेकर सुगबुगाहट

अखिलेश कुमार अखिल नई दिल्ली। आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों में सुगबुगाहट शरु हो गई है। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 में होने वाला है। सभी पार्टियां अभी से जुगत बैठाने में जुट गई हैं। आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए पिछले दिनों कांग्रेस के कुछ नेताओं ने बसपा सुप्रीमो बहन मायावती से मुलाकात की कोशिश की, सफल नहीं हो पाए। लेकिन राजनीतिक गलियारों में हलचल अवश्य पैदा हो गई है। हालांकि कांग्रेस भले ही इसे निजी पहल बताकर पीछे हटने की कोशिश कर रही है, लेकिन यह साफ दिखाई दे रहा है कि विधानसभा चुनाव से पहले विपक्षी राजनीति के भीतर नए समीकरणों की खो शुरु हो चुकी है। जबकि कांग्रेस फिलवक्त समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में है। वहीं मायावती ने बिना कुछ कहे यह संकेत दे दिया है कि वह फिलहाल किसी भी राजनीतिक संदेश या दबाव में आने वाली नहीं है।
दरअसल, पिछले दिनों कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के राष्टीय अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम और कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया मायावती से मिलने उनके आवास पहुंच गए। हालांकि मायावती से मिलने का समय नहीं मिला और पूरा प्रयास असफल हो गया। वहीं कांग्रेस नेतृत्व ने खुद को इस घटनाक्रम से अलग दिखाने की कोशिश की और दोनों नेताओं को नोटिस जारी कर दिया। पार्टी ने इसे अनधिकृत और निजी मुलाकात बताकर राजनीतिक नुकसान को सीमित करने का प्रयास किया।
गौरतलब है कि राहुल गांधी पहले भी सार्वजनिक रुप से स्वीकार कर चुके हैं कि पिछले विधानसभा चुनावों के दौरान उन्होंने मायावती को गठबंधन का प्रस्ताव दिया था। राहुल गांधी ने यह भी कहा था कि उन्होंने मायावती को मुख्यमंत्री पद तक की पेशकश की थी, लेकिन बसपा प्रमुख ने प्रस्ताव ठुकड़ा दिया था। इसके बाद कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी के साथ हाथ मिलाया और लोकसभा चुनावों में इस गठबंधन को अपेक्षाकृत अच्छा परिणाम मिला। अब जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, कांग्रेस के भीतर फिर यह सोच मजबूत होती दिखाई दे रही है कि बसपा को साथ लाए बिना भाजपा के खिलाफ व्यापक सामाजिक समीकरण तैयार करना कठिन होगा।
लेकिन यह कोशिश ऐसे समय में हुई जब समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव लगातार यह कह रहे हैं कि उनका मौजूदा गठबंधन आगे भी जारी रहेगा। लखनउ में आयोजित एक कार्यक्रम में अखिलेश यादव ने स्पष्ट कहा कि भविष्य के चुनावों में भी सहयोगियों के साथ गठबंधन बना रहेगा और उसका आधार सीटों की सौदेबाजी नहीं बल्कि जीत का लक्ष्य होगा। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी गठबंधन चलाना जानती है और उसने कभी अपने सहयोगियों को धोखा नहीं दिया। अखिलेश का यह बयान सीधे तौर पर कांग्रेस के लिए भी संदेश माना गया, क्योंकि राजनीतिक गलियारों में लगातार यह चर्चा चल रही थी कि कांग्रेस समानांतर राजनीतिक विकल्प तलाश रही है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में यह भी चर्चा है कि कांग्रेस सत्ता और राजनीतिक अवसरों के लिए सहयोगी बदलने में कभी देर नहीं लगाती। हाल के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव इसका उदाहरण माने जा रहे हैं। चुनाव के दौरान कांग्रेस द्रमुक के साथ खड़ी थह, लेकिन परिणाम आते ही सत्ता की संभावनाओं को देखते हुए उसने तेजी से पाला बदलकर टीवीके के साथ गठबंधन कर लिया और उसकी सरकार में भी शामिल हो गई। ऐसे में उत्तर प्रदेश में भी कांग्रेस की वर्तमान सक्रियता को केवल औपचारिक राजनीतिक संपर्क मानना आसान नहीं है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button