जनकवि बाबा नागार्जुन की 115वीं जयंती पर श्रद्धांजलि

-साहित्य और समाज के प्रति योगदान को किया नमन

विशेष प्रतिनिधि
दरभंगा। जनकवि बाबा नागार्जुन की 115वीं जयंती पर विद्यापति सेवा संस्थान एवं लनामिवि के पीजी मैथिली विभाग की ओर से केंद्रीय पुस्तकालय परिसर स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। वक्ताओं ने उनके साहित्य, सामाजिक सरोकारों और जनपक्षधर विचारों को आज भी प्रासंगिक बताया।
पीजी मैथिली विभागाध्यक्ष प्रोण् अरुण कुमार कर्ण ने कहा कि बाबा नागार्जुन ने अपनी सशक्त लेखनी से जीवनभर वर्चस्ववादी शक्तियों के विरुद्ध प्रतिरोध की संस्कृति को मजबूत किया। जनहित के विरोधियों के खिलाफ उनका संघर्ष और वैचारिक प्रतिबद्धता आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। विद्यापति सेवा संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. बुचरु पासवान ने कहा कि बाबा नागार्जुन समतामूलक समाज के प्रबल समर्थक थे और उनकी निर्भीक साहित्यिक आवाज आज भी नई पीढ़ी को दिशा देती है।
श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने कहा कि बाबा नागार्जुन का साहित्य समाज के अंतिम व्यक्ति की पीड़ा और संघर्ष का सशक्त दस्तावेज है। उनके विचार आज भी सामाजिक न्यायए समानता और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने की प्रेरणा देते हैं। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।

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