बिहार में 225 संबद्ध महाविद्यालय के कर्मियों का भविष्य अधर में

आर.के.राय
वरिष्ठ पत्रकार

समस्तीपुर, 14जून 2026 (एजेंसी)।बिहार में 225 संबद्ध महाविद्यालय के कर्मियों का भविष्य अधर में लटका हुआ है।उन्हें दी जाने वाली अनुदान की राशि फाइलों में दफन होकर रह गई है।इस वजह से हजारों शिक्षक-कर्मचारी भुखमरी से जूझ रहे हैं।

जानकार सूत्रों के अनुसार बिहार सरकार एक ओर हर प्रखंड में नए डिग्री महाविद्यालय खोलने और उच्च शिक्षा के विस्तार का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर राज्य के 225 संबद्ध डिग्री महाविद्यालय सरकारी उपेक्षा से त्रस्त है।वर्षों से अनुदान के नाम पर घोषणाएं, समितियां और आश्वासन दिए जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर हालात यह हैं,कि हजारों शिक्षक और कर्मचारी आर्थिक असुरक्षा के बीच जीवन गुजारने को मजबूर हैं।

शिक्षक संगठनों का आरोप है, कि सरकार ने पहले छात्रों के परीक्षा परिणामों के आधार पर दो वित्तीय वर्षों का अनुदान दिया। इसके बाद बड़े जोर-शोर से घोषणा की गई कि राज्य के सभी संबद्ध महाविद्यालयों को एकमुश्त एक करोड़ रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाएगी,लेकिन यह घोषणा भी कागजों और भाषणों तक सीमित रह गई है।

गौरतलब है, कि शिक्षा विभाग के तत्कालीन सचिव असंगबा चुबा आओ ने अनुदान वितरण के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए थे। इसमें आरटीजीएस/एनईएफटी के माध्यम से सीधे शिक्षकों एवं कर्मचारियों के खातों में भुगतान, महाविद्यालयों के लिए वेबसाइट निर्माण, वेतन संबंधी सूचनाओं का सार्वजनिक प्रदर्शन तथा अनुदान प्रक्रिया को ऑनलाइन करने के लिए विशेष पोर्टल विकसित करने की घोषणा की गई थी।

सरकार ने पारदर्शिता और जवाबदेही का दावा भी किया था।लेकिन वर्षों बाद भी न तो नियमित अनुदान व्यवस्था लागू हो सकी और न ही हजारों शिक्षकों-कर्मचारियों को कोई स्थायी राहत मिल सकी। कई संबद्ध महाविद्यालय आज वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं।

शिक्षकों का कहना है,कि महंगाई लगातार बढ़ रही है, लेकिन सरकार की ओर से केवल आश्वासन मिल रहा है, समाधान नहीं।
इससे सरकार की मंशा पर सवाल उठने लगा है।विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की गई थी। उस समय दावा किया गया था,कि संबद्धमहाविद्यालयों की समस्याओं का स्थायी समाधान निकालाजाएगा,लेकिन चुनाव खत्म होते ही समिति की रिपोर्ट, उसकी अनुशंसाएं और कार्रवाई सब रहस्य बनकर रह गई।एल.एस.

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