फोन हैक कर सात करोड़ की चपत
-हैकर्स ने फोन हैक कर बदला कॉन्टैक्ट नंबर
-4 करोड़ रुपये अलग.अलग खातों में फ्रीज़
भारत पोस्ट संवाददाता
नई दिल्ली। देश की राजधानी में साइबर अपराधियों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि अब वीवीआईपी और रसूखदार लोग भी उनके बिछाए जाल से अछूते नहीं हैं। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री इंदर कुमार गुजराल के बेटे और पूर्व राज्यसभा सांसद नरेश गुजराल एक बेहद शातिर और हाईटेक साइबर धोखाधड़ी का शिकार हो गए हैं। ठगों ने एक डिजिटल मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर उनकी पहचान का दुरुपयोग करके और उनकी कंपनी के कर्मचारी के मोबाइल फोन कॉन्टैक्ट्स में हेरफेर करके 7.8 करोड़ रुपये की बड़ी चपत लगा दी। राहत की बात यह है कि दिल्ली पुलिस की तत्परता के चलते ठगी गई रकम में से 4 करोड़ रुपये को अलग.अलग खातों में फ्रीज़ करवा दिया गया है।
जांचकर्ताओं के अनुसार, यह धोखाधड़ी 12 जून से 16 जून के बीच हुई। साइबर अपराधियों ने एक मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर गुजराल की डिस्प्ले पिक्चर का इस्तेमाल करके उनका नकली अकाउंट बनाया और खुद को गुजराल बताकर संपर्क किया। इसके बाद आरोपियों ने गुजराल की कंपनी के एक कर्मचारी से संपर्क किया और उन्हें ज़रूरी मैसेज भेजकर कई ट्रांसफर करने का निर्देश दिया, जो देखने में असली बिज़नेस ज़रूरतों से जुड़े लग रहे थे। मैसेज की असलियत पर भरोसा करते हुए, कर्मचारी ने चार अलग.अलग ट्रांज़ैक्शन किए और कुल 7.8 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए।
पुलिस ने बताया कि शुरू में इस धोखाधड़ी का पता नहीं चला क्योंकि पेमेंट रोज़मर्रा के बिज़नेस ऑपरेशन का हिस्सा लग रहे थे। इस प्रक्रिया के दौरानए बैंक ने असामान्य रूप से बड़े ट्रांज़ैक्शन को चिह्नित किया और कंपनी के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर से मंज़ूरी मांगी। बताया जाता है कि सीएफओ ने यह मानकर ट्रांसफर को मंज़ूरी दे दी कि उन्हें गुजराल ने अधिकृत किया था। यह स्कैम 16 जून को तब सामने आया जब कंपनी के एक अधिकारी को गड़बड़ी का शक हुआ और उन्होंने पेमेंट की पुष्टि के लिए गुजराल की बेटी से संपर्क किया। उन्होंने अपने पिता से बात की और पता चला कि उन्होंने ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया था। इसके बाद परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि धोखाधड़ी करने वालों ने सबसे पहले एक कर्मचारी को एक मैलिशियस फाइल भेजी थी, जिससे उसका मोबाइल फोन हैक हो गया। डिवाइस का एक्सेस मिलने के बाद, आरोपियों ने कथित तौर पर उसमें सेव कॉन्टैक्ट जानकारी में बदलाव कर दिया। जांचकर्ताओं ने बताया कि गिरोह ने कर्मचारी की कॉन्टैक्ट लिस्ट में गुजराल के फोन नंबर की जगह अपना नंबर डाल दिया, लेकिन उनकी प्रोफाइल पिक्चर वही रहने दी। नतीजतन, धोखाधड़ी करने वालों द्वारा भेजे गए मैसेज ऐसे लग रहे थे जैसे वे खुद गुजराल ने भेजे हों, जिससे यह धोखा और भी विश्वसनीय लग रहा था। कपड़ों का बिज़नेस चलाने वाले गुजराल ने कहा कि दुर्भाग्य से उनकी गैर.मौजूदगी में उनके इस स्कैम का शिकार हो गए। उन्होंने कहा, ष्मैं दिल्ली पुलिस की साइबर क्राइम टीम की तारीफ़ करता हूँ कि उन्होंने तेज़ी से कार्रवाई की और लगभग 70 प्रतिशत रकम वापस पा ली। आने वाले दिनों में और रकम वापस मिलने की उम्मीद है।”


