रानी कुमारी की अभिरुचि कविता लेखन के अलावा इतिहास और पुरातत्व में भी है। यह मूलतः बिहार के नवादा की निवासी और मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर के सरकारी कालेज की प्राध्यापिका हैं। प्रस्तुत है इनसे राजीव कुमार झा की बातचीत…
साहित्य: साक्षात्कार
प्रश्न:अपने घर परिवार शुरुआती पढ़ाई लिखाई और माता- पिता के बारे में बताइए।
उत्तर: मेरे घर में मेरे माता – पिता, दो भाई और तीन बहने हैं। मेरी माता एक धार्मिक प्रवृत्ति की महिला है, उनके सान्निध्य में जो भी सीखा और ग्रहण किया है उसको पारंपरिक रूप से विरासत के रूप में अपनी बेटियों को भी हस्तांतरित करने का प्रयास कर रही हूं। मेरे पति रेलवे में है, मेरी दो पुत्रियां हैं जो वर्तमान में जबलपुर के स्कूल में अध्यनरत हैं।
मेरी स्नातक तक की पढ़ाई नवादा, बिहार में ही हुई है और आगे की पढ़ाई जबलपुर में की हूं।
प्रश्न: हमारे देश के प्राचीन ग्रंथों के अध्ययन और विश्लेषण में आपकी अभिरुचि है। इन ग्रंथों में समाज संस्कृति और धर्म की विवेचना है। हमारे प्राचीन ग्रंथों में किन ग्रंथों का विवेचन और विश्लेषण विद्वानों के लिए जिज्ञासा और उत्कंठा का विषय रहा है।
उत्तर :हमारे प्राचीन ग्रंथों में रामायण और महाभारत महत्वपूर्ण ग्रंथ माने गए हैं यद्यपि आज के परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो रामचरितमानस की महत्ता बढ़ गई है लेकिन गोस्वामी तुलसीदास की रामचरितमानस से इतर रामायण और महाभारत के प्राचीन ग्रंथ आज के संदर्भ में प्रासंगिक साबित हो सकती है, क्योंकि मैंने इन ग्रंथों का अध्ययन कई बार किया है और हर बार मुझे एक नए नई दृष्टि और ज्ञान होता है जिससे इन ग्रंथों की व्याख्या और विश्लेषण करने में उत्सुकता और रोचकता रहती है।
प्रश्न: आप नवादा की हैं। इस जिले की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से अवगत कराइए।
उत्तर नवादा जिला ऐतिहासिक दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण है, यहां एक संग्रहालय भी है जो नारदः संग्रहालय के नाम से जाना जाता है। यहां पर बौद्ध और पालकालीन पुरातात्विक अवशेषों की प्रचुर मात्रा में उपलब्धता है ।अभी हाल ही में, मैंने नवादा की यात्रा की थी और इस संग्रहालय में जाकर उन अवशेषों का एकत्रीकरण किया था ताकि अपने आने वाले पुस्तक में मैं नवादा जिला के ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का विश्लेषण अच्छे से कर सकूं।
जहां तक इस क्षेत्र की ग्रामीण संस्कृति की बात है तो यह क्षेत्र अपने अंदर एक तरह की समग्रता को प्रस्तुत करती है, जहां एक और समाज के निम्न वर्ग के रूप में कई सारी जातियां यहां बसती है, वहीं उच्च वर्ग की संख्या भी बहुत है। लेकिन इन सब के होते हुए भी यहां एक तरह से समता पूर्ण जीवन की झलक देखने को मिलती है। हमारे नवादा में एक एक जगह ऐसा भी है जहां मुसहर नाम की जाति का निवास बहुत है लेकिन वहां हाल ही में एक बहुत ही भव्य मंदिर का निर्माण किया गया है जहां पर सभी जाति और वर्ग के लोग जाते हैं। इससे स्पष्ट होता है कि हमारे नवादा जिले में इस तरह का जातिगत भेदभाव नहीं किया जाता है और यह अपने आप में हमारे देश की संस्कृति के लिए एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करता है। साथ ही वैभव सूर्यवंशी जो मुख्यतः पटना में पले बढ़े हैं लेकिन उनका नानी घर नवादा जिले में ही है और यहां आते रहते हैं, तो इससे भी हमारे नवादा जिला की शान बढ़ी है। हाल ही में घोषित संघ लोक सेवा आयोग 2025 का परिणाम घोषित हुआ है जिसमें हमारे नवादा जिले के रवि जी ने 20 रैंक प्राप्त किया है, वह दिव्यांग हैं लेकिन उन्होंने जिस तरह से अपनी पढ़ाई संघर्ष से किया है वह एक मिसाल प्रस्तुत करती है।
प्रश्न:अब आप नरसिंहपुर में रहती हैं। यहां स्थानीय सरकारी कालेज में सहायक प्राध्यापक के तौर पर कार्य करती हैं।
अपने इस शहर के बारे में बताइए।
उत्तर: नरसिंहपुर जिला मेरी कर्मस्थली है जहां मैं पिछले छह से अधिक वर्षों से कार्य कर रही हूं। मेरे महाविद्यालय में साइंस, आर्ट्स और कॉमर्स तीनों stream से पढ़ाई कराई जाती है। हमारे कॉलेज में एनएसएस, एनसीसी, स्पोर्ट्स विभाग के अंतर्गत कई सारी गतिविधियां आयोजित की जाती हैं जिससे बच्चों का सर्वांगीण विकास हो सके। हमारे कॉलेज में कैरियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ भी है जिसके अंतर्गत विद्यार्थियों को उनके व्यावसायिक और अन्य क्षेत्रों के करियर के बारे में मार्गदर्शन मिल सकता है। नरसिंहपुर जिला कृषि के क्षेत्र में अग्रणी है, ग्रामीण संस्कृति की संपूर्ण झलक नरसिंहपुर में दिखती है।
प्रश्न:आपके कविता संग्रह भी प्रकाशित हुए हैं। अपनी अनुभूतियों और संवेदना के बारे में क्या कहना चाहेंगी?
उत्तर: मेरे कई कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं और जहां तक मेरी अनुभूति और संवेदना का प्रश्न है तो मैं ज्यादातर सामाजिक मुद्दों और महिलाओं की बारे में लिखती हूं। महिलाओं के अंतर्मन की व्यथा, समाज की विषमता, शासन की अव्यस्था को लेकर मैं प्रमुखता से लिखती हूं और आए दिन अपने विचार आर्टिकल के माध्यम से विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में भी प्रकाशित करवाती हूं ताकि समाज में चल रही कुरीतियों एवं अव्यवस्था से लोगों को जागरूक कर सकूं। लोग अपने अधिकारों के बारे में जान सकें साथ ही उनके जो कर्त्तव्य हैं उनके बारे में भी भली-भांति अवगत हों। महिलाओं को लेकर मैं हमेशा संवेदनशील रही हूं। मेरी कविताओं में महिलाओं की जीवन में घटित होने वाली हर एक क्षण को में मुखरता से प्रस्तुत करती हूं।


